दीपक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़।
शहर में शादी समारोहों में वीडियो ग्राफी और फोटोग्राफी करने वाले कुछ एजेंसियां वीडियोग्राफी में ड्रोन डिवाइस का उपयोग कर रही हैं। लेकिन इनमें से अधिकांश ने अनुमति नहीं ली है। जबकि भारत सरकार के नियमों के मुताबिक 200 फीट तक ड्रोन उड़ाने के लिए स्थानीय प्रशासन की और इससे अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरने के लिए डीजीसीए (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) की अनुमति प्राप्त करनी होती है।
शहर में इन ड्रोन डिवाइसों के बेलगाम इस्तेमाल के संबंध में नागरिक चेतना समिति ने नागरिक उड्यन मंत्रालय को पत्र लिखा है।
इन दिनों शादी समारोहों में वीडियोग्राफी करने में ड्रोन डिवाइस का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। इसमें दो राय नहीं है कि ऊंचाई से खींची गई तस्वीरें नया लुक पैदा करती हैं और गतिशील लगती हैं। लेकिन भारत सरकार ने इनके लिए अलग से नियमावली जारी की है। जिससे इसके दुरुपयोग की संभावना न रहे। साथ ही इसकी फ्लाइंग से कोई दुर्घटना की स्थिति न बने।
साइज के मुताबिक किया है श्रेणीबद्ध
भारत सरकार ने ड्रोन डिवाइस के साइज के आधार पर अलग अलग श्रेणियां निर्धारित की हैं। 250 ग्राम वजन से कम डिवाइस को नैनो श्रेणी में रखा है। 250 से दो किलो तक की डिवाइस को माइक्रो श्रेणी में रखा है। दो किलो से 25 किलो तक वजन की डिवाइस को मिनी श्रेेणी में रखा है। 25 से 250 किलो वजन तक की डिवाइस को स्माल की श्रेणी में रखा है। नैनो श्रेणी को छोड़कर सभी को डीजीसीए से रजिस्ट्रेशन हासिल करना होगा और एक यूआईएन (यूनिक इडेंटिफिकेशन नंबर) भी लेना होगा। साथ ही एयर डिफेंस क्लीयरेंस भी लेना होगा।
शैक्षिक संस्थानों को छूट
वह शैक्षिक संस्थान जोे तकनीक पर रिसर्च कर रहे हैं। शैक्षिक उपयोग के लिए, छात्रों के उपयोग के लिए छूट दी गई है। सुरक्षा की जिम्मेदारी शैक्षिक संस्थानों की होगी।
‘ड्रोन डिवाइस में 200 फीट तक उड़ान के लिए अनुमति जिला प्रशासन से लेनी होती है। इसके बाद डीजीसीए अनुमति देगा। हमारे पास अगर कोई शिकायत आई तो हम नियमानुसार कार्रवाई करेंगे ’
- राजेश कुमार पांडेय, एसएसपी