तकलीफ में मुस्कुराना ‘आई लाइक इट’
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
तकलीफ में मुस्कराना वाकई में बड़े दिल का काम है। इसलिए यहां मुझे यह कहने को विवश होना पड़ रहा है ‘आई लाइक इट’। मैंने तकलीफ को नजदीक से देखा ही नहीं है, बल्कि उसे जिया है।
अगर तकलीफ से मुलाकात नहीं हुई होती तो शायद मैं सीरियल और फिल्मों नहीं होता। यह कहना है सीरियल ‘भाबी जी घर पर हैं’ में अनोखेलाल सक्सेना का किरदार निभाने वाले सानंद वर्मा का।
शुक्रवार को वह एक निजी कार्यक्रम में हिस्सा लेने से पहले सराय मान सिंह स्थित माहेश्वरी क्रिएटिव क्लब के संरक्षक संजय माहेश्वरी के आवास पर पत्रकारों से रूबरू थे। सानंद ने जिंदगी में आए उतार-चढ़ाव को सिलसिलेवार रखा। उनका जन्म यूं तो पटना में हुआ है, लेकिन परवरिश दिल्ली में हुई है।
उन्होंने कहा कि मोतीहारी में सात साल की उम्र मेें अपने पिताजी के साथ खेतीबाड़ी में हाथ बंटाया है। पटना में किताबें बेची हैं। तीन-तीन पांडुलिपि भी लिख दी, लेकिन छपवाने से पहले उसे फाड़ दिया, क्योंकि मुझे तो अभिनय में कैरियर बनाना था। सो, उसी दिशा में कदम बढ़ाता गया। दिल्ली में कई अखबारों में रिपोर्टिंग भी की है। लेकिन उन्हें तो अभिनय का जुनून था। इसी जुनून ने मुंबई पहुंचा दिया।
एक प्राइवेट एंटरटेनमेंट चैनल में अच्छे पैकेज में नौकरी मिल गई। वह कहते हैं उन्हें यह नौकरी रास नहीं आई और एक दिन नौकरी छोड़ दी। फिर, ऑडीशन देने लगे। छह महीने तक संघर्ष करने के बाद उन्हें एड करने का ऑफर मिल गया। साढ़े तीन साल में 250 एड कर चुके हैं।
इसके अलावा ‘रेड’ फिल्म जिसमें अजय देवगन हैं, उसमें वह किरदार निभा रहे हैं। यह फिल्म 16 मार्च 2018 को रिलीज हो रही है। उन्होंने सफाई पर ध्यान देने की बात कही है। समय पर टैक्स जमा करें, बिजली चोरी न करें। सरकार का राजस्व बढ़ाएं। अगर सड़क पर गड्ढे हैं, गंदगी की सफाई नहीं हो रही है तो जरूर सरकार को गाली दें। कहा, सोशल मीडिया युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है।
भाबीजी घर पर हैं में टिल्लू का किरदार निभाने वाले कलाकार सलीम जैदी ने कहा कि किशोरावस्था में ही उनके माता-पिता का इंतकाल हो गया था। जिसके बाद उनकी बड़ी बहन फरहा जैदी ने उन्हें मां जैसा प्यार, दुलार दिया और कभी भी माता-पिता की कमी नहीं खलने दी। बहन के प्यार व भाई आदिल जैदी के सहयोग से ही वह आज इस मुकाम को हासिल कर पाएं हैं।
वहीं, दारोगा हप्पू सिंह का किरदार निभाने वाले योगेश त्रिपाठी ने दिल्ली से अलीगढ़ तक पहुंचने के सफर का आंखों देखा हाल बयां किया। उन्होंने कहा कि जितने अच्छे अलीगढ़ के लोग हैं, उतनी ही अच्छी यहां की सड़कें हो तो बात ही क्या?