अरे सर, यहां तो बिल्डिंग भी किराये की है...
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
अरे सर, यह विद्यालय तो किराये के भवन में चल रहा है। दो कमरे हैं, इनमें कक्षा एक से पांच तक के 50 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। यहां न तो शौचालय है और न ही पेयजल के इंतजाम। मकान मालिक ने भी शौचालय में ताला डाल रखा है।
शिक्षक एवं शिक्षिकाएं आसपास के लोगों से अनुरोध कर उनके शौचालय का उपयोग करते हैं। समस्या को देखते हुए मकान मालिक से कह कर उसके निजी उपयोग में आने वाला शौचालय तो खुलवा दिया है, लेकिन यह व्यवस्था कब तक चलेगी, कहा नहीं जा सकता।
प्रशासन के एक जिम्मेदार अफसर का यह बयान हमारी प्राथमिक शिक्षा का हाल बताने के लिए काफी है। नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने बताया कि शासन ने जिले में 55 प्राथमिक स्कूलों की दशा सुधारने और गुणवत्ता परक शिक्षण के मद्देनजर इन्हें जिला स्तरीय अफसरों को गोद दिया है। इ
सी सिलसिले में मै पूरे उत्साह से एक प्रायोजक के साथ विद्यालय पहुंचा था। ताकि यदि विद्यालय भवन की मरम्मत समेत अन्य कार्य कराने हों तो परेशानी न हो। वहां न बिजली मिली और न ही पानी। मैं तो यह देखकर आश्चर्यचकित रह गया कि घुटन और सीलन से भरे दो कमरों में बिना बिजली और पानी के कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों को पढ़ाया कैसे जा सकता है।
खुद सोच में पड़ गया हूं कि इस तरह के विद्यालय का विकास कैसे कराया जाए। निजी भवन के चलते यहां सरकारी धन तो लग नहीं सकता। उन्होंने बताया कि पता चला है कि जिले में 40 विद्यालय निजी भवनों में नाममात्र के किराये पर चल रहे हैं।
इन बिंदुओं पर करना है अफसरों को काम
- शिक्षा की गुणवत्ता
- विद्यालय का भौतिक परिवेश
- शिक्षकों की उपस्थिति
- छात्र-छात्राओं की उपस्थिति
- छात्र-छात्राओं का नामांकन
- विद्यार्थियों को योजनाओं का लाभ मिल रहा या नहीं