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नेत्र चिकित्सालय बंद करने का ऐलान

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गांधी नेत्र चिकित्सालय को बंद करने की धमकी
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।

ख्याति प्राप्त 80 साल पुराने गांधी नेत्र चिकित्सालय के अब बंद कर देने की बातें कही जा रही हैं। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि पीछे की ओर से सीसी सड़क तोड़कर और उसमें पाइप डालकर जो सवा लाख की आबादी का पानी अस्पताल परिसर में धकेला जा रहा है उससे पूरे परिसर में पानी भर रहा है।

ऐसे में मरीजों का यहां उपचार और भर्ती रहना संभव नहीं होगा। दूसरी ओर इस मामले को लेकर स्थानीय पार्षद पद्म सैनी और अन्य लोग नगर निगम के सेवा भवन पहुंचे।
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उन्होंने नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा और महापौर शकुंतला भारती से मुलाकात की। पार्षद ने आरोप लगाया कि गांधी नेत्र चिकित्सालय प्रशासन गुमराह कर रहा है।

अस्पताल के पीछे की जगह पोखर है। पहले भी वहां पर आबादी का पानी जाता रहा है। उन्होंने नगर आयुक्त को बताया कि चिकित्सालय प्रशासन पोखर को सूखी करके उसकी जमीन को भू माफिया को बेचना चाहता है।

गांधी नेत्र चिकित्सालय प्रशासन का कहना है

सीसी सड़क को जेसीबी से तोड़कर उसमें सीमेंट का पाइप डालकर हमारी जमीन पर आबादी का पानी छोड़ा जा रहा है जबकि यह नाली सीधे रामघाट रोड के नाले में जा रही है।

इसमें जबरदस्त सिल्ट भरी है जिससे पानी आगे फ्लो नहीं कर पा रहा है। बजाय इसके कि नगर निगम इन नाली को क्लीयर करके पानी का फ्लो ठीक करे, पार्षद और कुछ स्थानीय लोगों ने सड़क को ही क्षतिग्रस्त कर हमारी जमीन में पानी काट दिया है।

जिसे यह लोग पोखर कहते हैं वह दस्ताबेजों में बंजर भूमि दर्ज है, जिस पर गांधी नेत्र चिकित्सालय का स्वामित्व है। इस ट्रस्ट के जिलाधिकारी पदेन अध्यक्ष हैं। अगर इसी प्रकार परिसर में पानी भरता रहा तो हमें यह अस्पताल ही बंद करना पड़ेगा।
मधुप लहरी, प्रशासनिक अधिकारी, गांधी नेत्र चिकित्सालय

पार्षद और स्थानीय लोगों का कहना है

‘जहां पर पानी जा रहा है वह पोखर ही है। गांधी नेत्र चिकित्सालय आसपास की जमीनों पर अपना स्वामित्व का दावा करता रहता है। गांधी नेत्र चिकित्सालय के स्कूल में जब नगर निगम ने विकास कार्य करवाया, तो उन्होंने इसको स्वीकार लिया।
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जबकि नगर निगम सार्वजनिक स्थानों पर ही निर्माण करा सकता है। जब पोखर की बात आयी तो यह लोग अपना दावा करते हैं। इसके अलावा अस्पताल के परिसर में ही एक पंपिंग स्टेशन भी बना हुआ है। वहां पर आबादी को जलभराव से बचाने के लिए वहां पानी का उस जगह ड्रेन होना बहुत जरूरी है। मैं इसके लिए गोली खाने तक को तैयार हूं।’

पदम सैनी, पार्षद, महापौर और नगर आयुक्त से मिलकर बताते हुए
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