न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के अधिकांश निजी स्कूल बुधवार से खुल गए। पहले दिन कई विद्यालयों द्वारा जारी फीस पांच प्रतिशत बढ़ गई है। अन्य विद्यालयों में सात से नौ प्रतिशत तक फीस में बढ़ोत्तरी हो सकती है। इससे साफ तौर पर अभिभावक प्रभावित होंगे। वहीं बच्चों को थमाया जाने वाला स्कूल बैग नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दिखाई दे रहा है।
बता दें कि शहर के कई निजी स्कूल बुधवार को खुले। इनमें अधिकांश स्कूलों में दाखिले की भीड़ लगी रही। कई अभिभावक बच्चों की किताबें लेने स्टेशनरी की दुकानों पर पहुंचे। यहां जब अमर उजाला ने पड़ताल की तो पता चला कि बच्चों को तय मानक से 400 प्रतिशत अधिक वजन की किताबें थमाई जा रही हैं। गौरतलब हो कि सरकार ने बच्चों के स्कूल बैग के वजन को कम करने के लिए स्कूल बैग नियम लागू किया था।
लेकिन शहर में बुधवार को इस नियम की धज्जियां उड़ती हुई दिखीं। कक्षा दो के बच्चे की किताबें तथा कापियां आठ किलो तो कक्षा पांच के बच्चे की किताब-कापियां सात किलो 800 ग्राम की थीं। अगर प्रतिदिन आधी किताब-कापियां ही जाएंगी तो भी नियम से दोगुने वजन को लेकर बच्चे स्कूल जाएंगे। इस वजन में स्कूल बैग, पानी की बोतल, टिफिन आदि का वजन शामिल नहीं है। बाल रोग विशेषज्ञों की मानें तो अधिक वजन लादने के कारण बच्चों की पीठ तथा गर्दन दर्द करने लगती है। लगातार वजन लादने से बच्चे झुककर भी चल सकते हैं।
यह है स्कूल बैग के मानक
कक्षा स्कूल बैग का वजन
1-2 1.5 किलो
3-5 2-3 किलो
6-7 4 किलो
8-9 4.5 किलो
10 5 किलो
अधिक वजन लादने से छोटे बच्चों की पीठ तथा गर्दन में दर्द शुरू हो जाता है। सीढ़ी पर चढ़ने, तेज भागने पर गिरने का डर रहता है। जबकि लंबे समय अधिक वजन लादने से रीढ़ की हड्डी में भी परेशानी हो जाती है। - डॉ. प्रदीप बंसल, बाल विशेषज्ञ।