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वाहन के वीआईपी नंबरों की कालाबाजारी होगी बंद

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यतीश शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़।
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परिवहन विभाग बिना दलालों के वाहनों के वीआईपी नंबर न मिलने की प्रथा को तोड़ने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। इसी ओर विभाग ने एक और कदम उठाया है। ऑन लाइन बुकिंग होने के बाद भी कुछ शातिर किस्म के लोग वीआईपी नंबरों को ब्लॉक कर देते हैं, लेकिन अब वह ऐसा नहीं कर पाएंगे।

अब परिवहन विभाग का साफ्टवेयर वीआईपी नंबर लेते समय ट्रांजेक्शन फेल होने के दस मिनट बाद ही उस नंबर को अन्य व्यक्ति के लिए खोल देगा। इससे अब शातिर वीआईपी नंबरों को खरीद फरोख्त के लिए ब्लॉक नहीं कर पाएंगे।
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वर्तमान में यदि किसी वाहन स्वामी को वीआईपी नंबर लेना हो तो उसे परिवहन विभाग के पोर्टल से नंबर को ऑन लाइन खरीदना होता है।

इसके लिए सबसे पहले उसे वाहन का नाम, अपना नाम समेत अन्य जानकारी देनी होती है और इसके बाद पसंदीदा नंबर दर्ज करना होता है इसके बाद उसके एकाउंट से पैमेंट कट जाता है और नंबर उक्त व्यक्ति को मिल जाता है।

इसका मैसेज आरटीओ दफ्तर के अधिकारियों को मैसेज द्वारा मिलता है, लेकिन इसी में सेंधमारी कर कुछ शातिर किस्म के लोग जानकारी तो सही भरते थे, लेकिन जैसे ही पैमेंट कटने का ऑप्शन आता पोर्टल के पेज को बंद कर देते और उक्त नंबर ब्लाक हो जाता।

इससे अन्य लोगों के लिए भी उक्त नंबर मिलना संभव नहीं हो पाता। गत दिवस मुख्यालय में र्हुई बैठक में परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के सामने यह समस्या आई तो उन्होंने भी चिंता व्यक्त की।

बैठक में तय हुआ कि परिवहन विभाग के सॉफ्टवेयर को अपडेट किया जाए। इसके लिए मुख्यालय के संभागीय परिवहन अधिकारी संजय नाथ झा ने नई दिल्ली स्थित एनआईसी मुख्यालय के सीनियर टेक्निकल डायरेक्टर जॉयदीप शोम को वीआईपी नंबर बुकिंग साफ्टवेयर में संशोधन करने के निर्देश दिए हैं।

विभाग का सॉफ्टवेयर अपडेट होते ही वीआईपी नंबरों की खरीद-फरोख्त करने वालों की दुकान बंद हो जाएगी।


अब यह होगी व्यवस्था
वीआईपी नंबर लेने के लिए सबसे पहले एसबीआई पोर्टल से फीस पेमेंट के समय सफलता पूर्वक भरना व लंबित तीन प्रकार के ट्रांजेक्शन में से पेडिंग ट्रांसेक्शन में पेमेंट की कार्यवाही पूर्ण होने का वेटिंग टाइम 10 मिनट का रखा गया है।
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यदि इस दस मिनट में पेमेंट नहीं होता है तो उक्त नंबर को ब्लाक करने के स्थान पर अन्य आवेदककर्ता को दे दिया जाएगा।

गत दिवस मुख्यालय में हुई बैठक में यह मुद्दा काफी चर्चा में रहा। इसलिए विभाग के सॉफ्टवेयर को अपडेट करने का निर्णय लिया गया है।

एनआईसी मुख्यालय को भी पत्र भेज दिया है। जल्द ही यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसके बाद वीआईपी नंबरों की खरीद-फरोख्त करने वालों की दुकान स्वयं ही बंद हो जाएगी।
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