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बंदरों और कुतों का आंतक, जिला अस्पातल में 350 से ज्यादा एंटी रैबीज को आए

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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शहर में कुत्तों और बंदरों का जबरदस्त आतंक हो गया है। मंगलवार को मलखान सिंह जिला अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए 350 से ज्यादा लोग आए। इनमें एक बड़ी संख्या बंदरों के बच्चों को काटने की थी। घुड़ियाबाग से आई एक बच्ची केला खा रही थी, बंदर ने उस पर झपट्टा मारकर छीन तो डरकर पीछे हटी बच्ची पत्थर लगने पर घायल हो गई।

मलखान सिंह जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. यशपाल रावल कहते हैं कि सामान्यत: एक दिन में 220 से 250 केस एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने के आते हैं। लेकिन मंगलवार को सबसे अधिक संख्या 350 तक पहुंच गई। इसमें 50-60 केस बंदरों के काटने के आए।
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डॉ. रावल कहते हैं कि बंदरों के काटने के केस तेजी से बढ़े हैं। मंगलवार को घुड़ियाबाग की एक सात वर्ष की बच्ची स्नेहा को बंदर ने घायल कर दिया। उस पर झपट्टा मारा। बच्ची बंदर के आतंक से बुरी तरह भयभीत थी।

कागजों में सिमटा अभियान
नगर निगम का बंदरों को पकड़ने का और कुत्तों की नसबंदी का अभियान कागजों तक ही सिमटा हुआ है। स्थिति यह है कि नगर निगम का कैटल कैचर दस्ता भी ज्यादा प्रभावी नहीं है। उसकी दलील है कि वह आवारा पशुओं और मवेशियों को पकड़ने के लिए है।
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कुछ दिन पहले कमिश्नर जिला अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे तो वहां परिसर में आवारा घूम रहे कुत्तों का मुद्दा उठा था। उस समय कैटल कैचर दस्ता कमिश्नर के निरीक्षण के बाद आया था।
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