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अलीगढ़ में कलेजे के टुकड़े की गोली से मां का कलेजा निकला बाहर

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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अतरौली (अलीगढ़)।
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जिस मां का दूध पीकर बंटी पला, बढ़ा उसी मां के शरीर को गोलियों से छलनी करते हुए उसके हाथ भी न कांपे। खेत में दौड़ा-दौड़ाकर पिता की हत्या करने के बाद बेटे ने मां की भी हत्या कर दी। मां ने कभी न सोचा होगा कि उसका लाड़ला बेटा ही एक दिन गोली मारकर हत्या करेगा।

बंटी ने मां पुष्पा शर्मा के सीने में गोली आर-पार कर दी। गोली छाती से तमंचा सटाकर मारी गई जिससे मां का कलेजा ही बाहर निकल गया। इतने से भी मन शांत नहीं हुआ तो धारदार हथियार से प्रहार किया ताकि वह बच न सके।
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कई दिनों से खेतों में गेहूं की कटाई चल रही थी। वीरेंद्र शर्मा का बड़ा बेटा बंटी लगातार अपने पिता जान से मारने की धमकी दे रहा था। वारदात के बाद मौके पर चर्चा थी कि बंटी ने कह रखा था कि फसल मैं ही काटूंगा। अगर किसी ने फसल में हाथ लगाया तो जान से जाएगा। हालांकि बेटे की चेतावनी को नजरअंदाज कर वीरेंद्र शर्मा अपनी फसल कटवा रहे थे। उम्र होने के कारण खुद गेहूं की फसल काट नहीं सकते थे, इसलिए मजदूर लगा रखे थे। खेतों पर काम कर रहे मजदूरों ने पुलिस को बताया कि हमलावरों ने वहां पहुंचते ही सबसे पहले तमंचे दिखाकर उन्हें (मजदूरों को) भगा दिया।

हमलावरों के पास तमंचों के अलावा धारदार हथियार भी थे। पुलिस के अनुसार हमलावर हत्या करने का इरादा बनाकर ही पहुंचे थे। मजदूरों को भगाने पर वीरेंद्र शर्मा और बेटे बंटी के बीच झगड़ा होने लगा। बंटी की मां खेत के किनारे पेड़ के नीचे बैठी थी। वह बार-बार दोनों को समझा रही थीं कि झगड़ा मत करो। बैठकर बात कर लो। हालांकि उनकी बात किसी ने नहीं सुनी। विवाद के बीच ही हमलावरों के साथ मिलकर बंटी ने अपने पिता को खेतों में दौड़ा-दौड़ाकर हत्या की। इसके बाद पेड़ के नीचे बैठी मां को भी मार दिया।

पुलिस को मौका ए वारदात से चार खोखे मिले हैं। दो खोखे पुष्पा शर्मा के और दो खोखे वीरेंद्र शर्मा के शव के पास से मिले हैं। यह खोखे 32 बोर और 315 बोर के हैं। पुलिस के अनुसार इससे स्पष्ट है कि हमलावरों की संख्या अधिक थी। बंटी रामघाट रोड स्थित एक दूध डेयरी में नौकरी करता था। फिलहाल पूरे मामले की जांच में पुलिस जुटी है।

गोलियों की तड़तड़ाहट से बंधी घिग्घी
गोलियों की तड़तड़ाहट से खेतों में काम कर रहे मजदूरों की घिग्घी बंध गई। आसपास अन्य खेताें में काम फसल की कटाई करने वाले मजूदर और ग्रामीण काम छोड़कर गांव की भाग निकले। गांव में भी गोलियों की आवाज पहुंची, लेकिन किसी की गोलियों की आवाज वाली दिशा में जाने की हिम्मत नहीं पड़ी। बुजुर्ग वीरेंद्र शर्मा और पुष्पा शर्मा की हत्या कर हमलावर आराम से चले गए।

झगड़ा करने पर बंद भी हुए थे पिता-पुत्र
भूमि में हिस्सेदारी को लेकर करीब तीन साल से बंटी का अपने पिता से झगड़ा चल रहा था। पिता से मिली भूमि से वह संतुष्ट नहीं था। दोनों ओर से भूमि की हिस्सेदारी को लेकर कई बार तहसील में शिकायतें भी हुुई थीं, लेकिन विवाद का निपटारा नहीं हो सका। नौ अगस्त 2016 को दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ था। सितंबर में समझौता हो गया था। 24 फरवरी को फिर झगड़ा हुआ। झगड़ा बढ़ने पर पुलिस ने पिता और पुत्र को 50-50 हजार रुपये के मुचलके में पाबंद भी किया था। पंद्रह दिन पहले भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ था, जिस पर पुलिस ने दोनों पक्षों को शांतिभंग में बंद किया था।

अलीगढ़ का प्लाट है विवाद की जड़
बताते हैं कि वीरेंद्र शर्मा का अलीगढ़ में भी एक प्लाट है। इसकी कीमत करोड़ों रुपये की है। यह प्लाट विवाद की जड़ बताया जा रहा है। चर्चा है कि इस प्लाट में बंटी ने अपने पिता से हिस्सा मांगा था, लेकिन पिता ने प्लाट में बंटी को हिस्सा नहीं दिया। चर्चा है कि वीरेंद्र शर्मा ने अपनी भूमि और प्लाट की वसीयत अपने अन्य दोनों बेटों के नाम पर कर दी थी। इससे पिता-पुत्र के बीच विवाद गहरा गया था।
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जान बचाने के लिए काफी दूर तक भागे थे वीरेंद्र
मौका ए वारदात से ऐसा लग रहा है कि बेटे से अपनी जान बचाने के लिए वीरेंद्र शर्मा काफी दूर तक भागे थे। उनकी चप्पल खेतों में ही छूट गई थी। उनकी पत्नी का शव काफी दूर पड़ा था। वीरेंद्र शर्मा की चार बेटियां भी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। पति-पत्नी की मौत के बाद से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। रिश्तेदारों के साथ ही गांव के ज्यादातर लोग पोस्टमार्टम हाउस पर जमा थे।
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