इगलास रोड स्थित गांव सहारा के पास स्थित गुप्त तीर्थस्थल पाताल खेड़िया का इतिहास साढ़े पांच हजार वर्ष से पुराना है। जी हां, इस स्थान के बारे में विश्वकर्मा पुराण, स्कंद पुराण, शिव पुराण, मुंबई प्रेस, तीर्थांकर गोरखपुर प्रेस में उल्लेख किया गया है।
ग्रंथों में लिखा है कि कार्तिकेय भगवान शिव के बड़े पुत्र थे, जिन्होंने ताड़कासुर का वध किया था। पाताल खेड़िया पूर्व में तारकवन, धर्मारण्य तीर्थ, मूजबन, सरकानन, सरकंडावन के नाम से जाना था और बाद में समयकाल के हिसाब से नाम भी बदले गये। ग्रंथों की मानें तो यहां पर प्रलंभासुर राक्षस आकर छिप गया था, जिसका वध भी यहीं किया गया था।
अलीगढ़ से लगभग 22 किलोमीटर इगलास रोड स्थित सहारा के पास सटा गांव पाताल खेड़िया है। यहां के बारे में इतिहास में भगवान शिव की तीन शिवलिंगों का उल्लेख बड़े स्तर पर किया गया है। यहां पर तीन विशालकाय शिवलिंग हैं। पहला शिवलिंग श्री कुमारेश्वर महादेव है, जिसकी ऊंचाई 7 फ ीट 4 इंच तथा गोलाई 7 फ ीट 4 इंच है। दूसरा शिवलिंग प्रतिज्ञेश्वर महादेव है, जिसकी ऊंचाई 6 फीट 11 इंच और गोलाई 5 फ ीट 8 इंच है।
तीसरा शिवलिंग कपालेश्वर महादेव है, जिसकी ऊंचाई 9 फ ीट 4.7 इंच और गोलाई 5 फ ीट 7 इंच तक है। पुजारी मोहन गिरी नागा बाबा ने बताया कि यहां पर कई बार पुरातत्व विभाग की टीम आगरा से आकर अवलोकन कर चुकी है। इस जगह का दक्षिण भारत में भी स्वामी कार्तिकेय/मुरूगनस्वामी के पूजन में विशेष महत्व माना गया है।
द्वापर में भगवान शंकर के पुत्र कार्तिकेय ने शिवलिंग की स्थापना की थी, जिसकी ख्याति कुमारेश्वर शिवलिंग के नाम से दूरदराज क्षेत्रों तक फैली हुई है। कार्तिकेय ने द्वापर में ताड़कासुर राक्षस का वध करने के बाद प्रायश्चित के लिए इस शिवलिंग की स्थापना की थी।
कुमारेश्वर मंदिर जाने के लिए आपको अलीगढ़-मथुरा मार्ग स्थित इगलास के गांव पाताल खेड़िया पहुंचना होगा। यहीं पर कुमारेश्वर मंदिर दिखाई पड़ जाएगा। हालांकि, रास्ते में दो शिवलिंग और दिखाई देंगे।