शहर और उसके आसपास के इलाकों से हर महीने 50 से 60 गायें छोड़ी जा रही हैं। दूध बंद होने के बाद गोपालक इन्हें छोड़ देते हैं। जिसे नगर निगम का कैटल कैचर दस्ता पकड़ कर सरकारी गोशाला ले जाता है। अगर गोपालक इन्हें गोशाला से वापस लाते हैं तो उन्हें एक हजार रुपये की रसीद कटवानी पड़ती है।
नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डॉ.राजेश वर्मा कहते हैं कि लोगों को गायों को नहीं छोड़ना चाहिए। अगर गोमाता का दूध पीया है तो उसकी सेवा भी करनी चाहिए। हर महीने लोग लगभग 50 से 60 गायों को छोड़ रहे हैं। इनको नगर निगम की दो गोशालाओं में पाला जा रहा है। गाय छोड़ने के बाद जो लोग इन्हें वापस लेना चाहते हैं उन्हें 1000 रुपये की रसीद कटवानी पड़ती है।
सहभागिता के नियमों में हुआ बदलाव
अलीगढ़। मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना के तहत सरकारी गोशाला से छह महीने बाद ही किसी व्यक्ति को गाय को सौंपा जा सकता था। इसके बाद यह समय अवधि तीन महीने की हुई। अब एक महीने में ही ऐसी गाय को किसी को दिया जा सकता है, जो कहीं से आई हो। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि समय अवधि एक महीने करने से अब गायों को उचित लोगों को दिया जा सकेगा। इस योजना में शामिल लोगों को एक गाय पर हर महीने 1500 रुपये मिलते हैं। वर्तमान में लगभग 2300 लोगों ने इस योजना में गाय ली हैं। उन्होंने बताया कि गुड फ्राइडे के अवकाश में दादों, हरदोई, पालीमुकीमपुर, दुधमा और तोछी की गोशाला का निरीक्षण किया गया, जहां व्यवस्थाएं संतोषजनक मिली हैं।