हमने यहां दवा निर्माण के लिए करार किया था। उम्मीद थी कि सरकारी जमीन आसान किश्तों व सस्ती कीमत में मिलेगी। मगर ऐसा नहीं हुआ। इसलिए छह माह पहले बंगलूरू में सरकारी भूमि मिलने पर अपनी नई इकाई वहां लगाई है। अगर यहां भूमि ख्यामई में विकसित हो रहे इंडस्ट्रीयल एस्टेट में मिलेगी तो अपनी इकाई लगाएंगे।-सौरभ बालजीवन, बालजीवन ग्रुप
हमने टूरिज्म क्षेत्र से अपने होटल प्रोजेक्ट के लिए करार किया था। उसके लिए निजी भूमि तलाश रहे हैं। मगर कीमत महंगी होने के कारण जमीन नहीं ले पाए। इसलिए प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया है।-निखिल अग्रवाल, मिल्कबार ग्रुप
ये वे निवेशक हैं जिन्हें उम्मीद थी कि सरकार से भूमि मिल जाएगी और वह अपनी इकाई लगा लेंगे। मगर ऐसा नहीं है। हां, हम ख्यामई में इंडस्ट्रीयल एस्टेट विकसित कर रहे हैं। मगर उसमें भी इतने लोगों को नियम शर्तों के अनुसार भूमि नहीं दे पाएंगे। इसलिए अब इन्हें खुद निर्णय लेना होगा।-वीरेंद्र सिंह संयुक्त आयुक्त उद्योग
जिन उद्यमियों को भूमि की जरूरत है, उन्हें जिले के इंडस्ट्रीयल एरिया में जहां जगह है, वहां वरीयता के आधार पर भूमि दिलवाई जाएगी। बाकी उनकी समस्याओं का भी क्रमवार समाधान कराया जाएगा। जल्द इस दिशा में ठोस कदम उठेंगे।-संजीव रंजन, डीएम
ये हुए थे 55 हजार करोड़ के 496 करार
इंवेस्टर समिट में 55 हजार करोड़ रुपये के निवेश के 496 करार हुए। इनमें एमएसएमई, होर्टिकल्चर, आईटी, एक्सप्रेस वे, यूपीएसआईडीसी, स्वास्थ्य, होटल आदि क्षेत्र के करार थे।
ये 6 हजार करोड़ की 230 इकाई शुरू
जिले में अब तक 6 हजार करोड़ के निवेश के करार वाली 230 इकाइयां शुरू। उनमें उत्पादन शुरू। ये अधिकांश एमएसएमई स्तर की इकाइयां। जिनमें डेयरी, ताला, हार्डवेयर आदि क्षेत्र की इकाइयां शामिल हैं।