न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
हर साल दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश एवं जिले में अग्रणी दुग्ध उत्पादकों को गोकुल पुरस्कार दिया जाता है। इस बार यह प्रतिष्ठित पुरस्कार पर अतरौली के गांव पैडरा निवासी श्योराज सिंह को मिला है। उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के दुग्ध विकास मंत्री चौ. लक्ष्मीनारायण ने बतौर पुरस्कार 51 हजार रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्र एवं भगवान कृष्ण की मूर्ति गाय एवं बछड़े के साथ का स्मृति चिह्न दिया।
बताते चलें कि गोकुल पुरस्कार में प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले दुग्ध उत्पादक को दो लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिह्न दिया जाता है। दूसरे स्थान पर रहने वाले दुग्ध उत्पादक को डेढ़ लाख रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न दिया जाता है। जनपद स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले दुग्ध उत्पादक को जनपदवार 51 हजार रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न दिया जाता है।
इस साल गोकुल पुरस्कार पर पराग डेयरी दुग्ध उत्पादन समिति को पूरे साल में 16,165 लीटर दुग्ध उपलब्ध कराने वाले अतरौली के गांव पैडरा निवासी श्योराज सिंह पुत्र विजय सिंह को दिया गया है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी गांव अमा मदा अकराबाद निवासी मुनीशचंद को पछाड़ा। पिछली बार गोकुल पुरस्कार पर मुनीशचंद्र ने कब्जा जमाया था और श्योराज सिंह दूसरे स्थान पर रहे थे। पराग डेयरी के प्रोडक्शन इंचार्ज आलोक कुमार ने बताया कि पिछली बार मुनीशचंद ने पूरे साल में 12 हजार लीटर से अधिक दुग्ध उपलब्ध कराकर यह पुरस्कार जीता था, लेकिन इस बार श्योराज सिंह ने 16165 लीटर दुग्ध उपलब्ध कराकर इस पुरस्कार पर कब्जा जमाया।
2001 में हुई थी पुरस्कार की शुरुआत
गोकुल पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2001 में गृह मंत्री राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में हुई थी। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इस पुरस्कार की शुरुआत की गई थी।
सरकार से पुरस्कार पाकर खुश हैं पैंडरा के लोग
गांव पैंडरा निवासी चौ. श्योराज सिंह को प्रदेश सरकार द्वारा दुग्ध पालन के क्षेत्र में दिए गए गोकुल पुरस्कार से गांव में खुशी का माहौल है। पुरस्कार प्राप्त कर श्योराज सिंह मंगलवार शाम जब गांव पहुंचे तो चौ. राय सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। श्योराज सिंह ने बताया कि उनके पास तीस सालों से पराग की दूध डेयरी है, जिसके वह सचिव हैं। डेयरी की शुरुआत उनके पिता स्व. विजय सिंह ने की थी। उनके पास खुद की आठ भैंस व चार गायें हैं। बेटा सतेंद्र सिंह डेरी चलाते हैं। अन्य पशुपालकों से भी वह दूध खरीदते हैं। इस पुरस्कार को पाकर वह बेहद खुश हैं।