न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू कैंपस में बुधवार रात गश्त कर रहे सुरक्षाकर्मियों के उस समय पसीने छूट गए, जब गेस्ट हाउस नंबर 3 के पास एक संदिग्ध को घूमते हुए देखा गया। उसके हाथ में काफी मोटा कलावा और गले में माला देख सुरक्षाकर्मियों के होश उड़ गए। तत्काल उसे धरना स्थल पर मौजूद छात्रों की नजर से बचाते हुए प्रॉक्टर कार्यालय लाया गया। बाद में वहां से उसे सिविल लाइंस पुलिस के हवाले कर दिया गया।
थाने में हुई पुलिस पूछताछ में उसने अपना नाम पता आशीष पुत्र जयप्रकाश निवासी शाहकुंज मौर्या हॉस्पिटल के सामने थाना हाईवे बताया। इस पते के आधार पर सिविल लाइंस पुलिस ने हाईवे पुलिस से संपर्क कर उसके घर सत्यापन के लिए पुलिस भेजी। वहां से जानकारी मिली कि यह पेशे से प्रापर्टी डीलर था।
घर में पत्नी, बच्चे व पिता आदि रहते हैं। पिछले कुछ समय से व्यापार में मंदा होने और नुकसान होने के कारण इसकी मानसिक दशा कुछ ऐसी हो गई है कि जो कोई कुछ भी बता दे, वही मान लेता है। इसे लेकर उसके उपचार संबंधी दस्तावेज भी मथुरा पुलिस ने सिविल लाइंस पुलिस को व्हाट्सएप के जरिये भेजे। यह भी बताया कि वह हाथरस में अपनी मां से मिलने जाने की कहकर निकला था। अब अलीगढ़ कैसे पहुंच गया, कुछ नहीं पता।
इधर, खुद आशीष ने पूछताछ में बताया कि वह हाथरस अपनी रिश्तेदारी में मौजूद मां के पास मिलने गया था। मगर वहां से किसी ने यह बता दिया उसकी मां अलीगढ़ के ज्वालापुरी में रह रही हैं। इस पर वह हाथरस से अलीगढ़ बस में सवार होकर देर रात यहां आ गया।
यहां बस स्टैंड पर उतरने पर उसने लोगों की भीड़ में एएमयू में हो रहे घटनाक्रम का जिक्र सुना तो वह एएमयू में यह घटनाक्रम देखने के इरादे से चला आया था। इसलिए यहां उसे पकड़ा गया। सीओ तृतीय संजीव दीक्षित के अनुसार उसकी बातों से वह संदिग्ध प्रतीत हो रहा है। हालांकि परिजनों ने बीमारी का तर्क दिया है। फिर भी उसे एहतियातन किसी संदेह को ध्यान में रखते हुए जेल भेजा गया है।