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कोर्ट को गुमराह कर ली जमानत, खुलासे पर खारिज

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कोर्ट को गुमराह कर ली जमानत, खुलासे पर खारिज
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।

एक अभियुक्त ने तथ्यों को छिपाकर न्यायालय से जमानत हासिल कर ली। इसकी जानकारी जब वादी पक्ष के अधिवक्ता ने पत्रावलियों के साथ कोर्ट को दी तो कोर्ट ने अपहरण और दुष्कर्म के आरोपी अभियुक्त के जमानत आदेश को निरस्त कर उसे फिर से गिरफ्तार करने के आदेश दिए हैं।

थाना टप्पल में गांव पीपली के विरमा के खिलाफ धारा 363, 366, 7/8 पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। उसे इस मामले में 30 मार्च 2017 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। अभियुक्त विरमा ने अपनी जमानत के लिए अपर सत्र न्यायाधीश 12 के यहां प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन उस प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया गया। उसके बाद उसकी ओर से अपर सत्र न्यायाधीश नौ के यहां जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया। इस प्रार्थना पत्र को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और विरमा को जमानत पर रिहा कर दिया।
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जब यह जानकारी वादी पक्ष के अधिवक्ता नीरज चौहान को हुई तो उन्होंने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या नौ को इन तथ्यों से अवगत कराया कि विरमा ने न्यायालय को गुमराह कर जमानत प्राप्त की है। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि विरमा की ओर से इस कोर्ट में जमानत याचिका दायर करते समय यह कहा गया है कि यह उसकी पहली जमानत याचिका है और उसकी ओर से कोई जमानत याचिका पूर्व में दायर नहीं की गई है, जबकि पूर्व में उसकी ओर से अपर जिला एवं सत्र न्यायालय कोर्ट संख्या 12 में जमानत याचिका दायर की जा चुकी थी और इसे कोर्ट ने खारिज भी कर दिया था। अधिवक्ता ने जब एडीजे कोर्ट नौ को यह जानकारी दी तो कोर्ट ने जमानत खारिज करने व विरमा को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। अभियुक्त के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया जाए।
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