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14 और 15 दोनों दिन मनाई जाएगी जन्माष्टमी

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14 और 15 दोनों दिन मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।

अलीगढ़। भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी भरणी गंड योग के कारण श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 14 और 15 अगस्त को मनाई जाएगी। श्री गुरू ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. ह्रदय रंजन शर्मा ने बताया कि 14 अगस्त की शाम 7.45 बजे से मंगलवार की शाम 5.40 तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मान्य रहेगी।

अष्टमी दो प्रकार की होती है। पहली अष्टमी दूसरी जयंती अष्टमी का व्रत करने के लिए वह तिथि उपयोगी है। इसमें रोहिणी नक्षत्र न हो अष्टमी व्रत करने वाले अग्रिम दिन या रात 12 बजे के बाद नवमी तिथि में व्रत धारण करें। जन्माष्टमी में यदि एक कला भी रोहिणी नक्षत्र हो तो उसे श्री कृष्ण जयंती कहते हैं।
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अष्टमी में रोहिणी नक्षत्र मिलने से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतोत्सव (पर्व दिन) बन जाता है। अत: दोनों दिन शैव व वैष्णव मत वाले श्रद्धालु उपवास रख सकते हैं। शैवमत अनुसार 14 अगस्त सोमवार एवं वैष्णव मतानुसार 15 अगस्त मंगलवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी।
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ऐसे करें पूजा
सर्व प्रथम स्नान से निवृत्त होकर घर व पूजा घर में साफ सफाई करें, पूजा घर में नया कपड़ा लाल, हरा, पीला, केसरिया, गुलाबी आदि रंग का बिछाकर, रंग बिरंगी झालरों, फूल मालाओं से पूजा घर को सजाएं। घर में रंगोलियों बनाए। प्रभु देवी-देवताओं को सुंदर आकर्षक वस्त्र पहनाएं। एक बड़ा सा खीरा लेकर उसमें सालिग्राम या लड्डू गोपाल को विराजमान कराएं। रात 12 बजे खीरे से प्रभु को निकाले। साफ करके पंचामृत से स्नान कराए फिर पालने में या पूजा घर में प्रभु को स्थापित करके पूजा, हवन, आरती करने के बाद भोग प्रसाद बांटे, व्रत रखने वाले पूजा आरती के बाद व्रत खोले।
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