एएमयू में ऑडिट के नाम पर 4 करोड़ से अधिक की धनराशि स्वाहा होने की आशंका है। एएमयू प्रशासन द्वारा 7 से 12 मई तक के अवकाश पर रोक लगा दी गई है। इस अवधि में तीन अवकाश हैं। ऐसे में एएमयू के शिक्षक एवं कर्मचारियों को करीब 4 करोड़ से अधिक की धनराशि डीएल के रूप में भुगतान करनी पड़ेगी।
एएमयू की शैक्षणिक, शोध, वित्तीय एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑडिट के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा पांच सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया गया है। टीम के सदस्य 8 मई यानी सोमवार को ऑडिट के लिए पहुंच रहे हैं और 12 मई तक अपने कार्यों को अंजाम देंगे। मंत्रालय की इस ऑडिट के कारण अधिकारी बेहद दबाव में हैं। स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एएमयू में रविवार को तमाम विभाग एवं कॉलेज खुले रहे और ऑडिट से संबंधित तैयारी चलती रही। रविवार के अतिरिक्त 10 मई को ब्ुद्ध जयंती एवं 12 मई को ईद मिलादुन्नबी (बारावफात) के अवकाश पर भी रोक लगा दी गई है।
अमुटा के संयुक्त सचिव अशरफ मतीन का कहना है कि इस ऑडिट के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अवकाश पर रोक लगाना लोगों के समझ में नहीं आ रहा है। इस तीन दिन के बदले एएमयू के शिक्षक एवं कर्मचारियों को करीब 4 करोड़ रुपये डीएल के रूप में भुगतान करना पड़ेगा, जो पब्लिक फंड का दुरुपयोग है।
उल्लेखनीय है कि मंत्रालय द्वारा गठित पांच सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी के कोआर्डिनेटिंग ऑफिसर बंगलूरू के सुधांशु मोहंती हैं। इसके अन्य सदस्यों में महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी अजमेर के वाइस चांसलर प्रो. कैलाश सोदानी, आईआईटी मद्रास के डॉ. श्रीपद करमालकर, गोहाटी यूनिवर्सिटी के डॉ. मजहर आसिफ एवं आईआईएम बंगलूरू के प्रो. शंकरशन बसु शामिल हैं।