फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chhath Puja: नहाय-खाय से शुरू हुआ छठ पर्व, आज से 36 घंटे निर्जला उपवास रहेंगी महिलाएं

Sun, 26 Oct 2025 11:33 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

छठ पूजा का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक है। इस व्रत में महिलाएं पूरे 36 घंटे तक निर्जला उपवास करती हैं। इस व्रत में भगवान भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा की जाती है।
विज्ञापन
विनय नगर में छठ पूजा पर पूजा करती महिलाएं - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भगवान सूर्य की उपासना का महापर्व 25 अक्तूबर से शुरू हो गया है। चार दिन का पर्व शनिवार को नहाय-खाय के पारंपरिक विधि-विधान से घरों में शुरू हो गया है। छठ पूजा का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक है। इस व्रत में महिलाएं पूरे 36 घंटे तक निर्जला उपवास करती हैं। इस व्रत में भगवान भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा की जाती है।

विज्ञापन


पहले दिन नहाय-खाय से शुरू हुआ। रविवार को महिलाएं खीर खाने के बाद खरना का प्रसाद वितरण करती हैं। इसके बाद से निर्जला व्रत की शुरुआत हो जाती है। महिलाओं के परिजन सूप को सिर पर रखकर घाटों तक ले जाएंगे। सूप में रोली, सिंदूर, आरता, घी, सुपारी, पान पत्ता, धगी, जायफल, सूखा नारियल, छुआरा, किशमिश, मेवा, अखरोट, दीपक, गाजर, अदरक, सिंघाड़ा, सुथनी, संतरा, सेव, शकरकंद, आंवला, कच्चा बादाम, गन्ना, कच्चा नारियल, गागल, गुड़, गाय का दूध, अरवा चावल, बादाम, आम का लकड़ी, गेहूं और अरवा चावल का आटा, दउरा समेत अन्य पूजा सामानों को शामिल करते हैं। सोमवार की शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगी।

ज्योतिषाचार्य हृदय रंजन शर्मा ने कहा कि छठ पूजा के महत्व और परंपराओं से संबंधित अनेक लोक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें से एक लंका विजय के बाद राम राज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता के उपवास रखने के विषय में है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सुरक्षित घाटों पर ही करें पूजा, गहरे पानी में न उतरें : आपदा अधिकारी

अलीगढ़ जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से छठ पर्व पर श्रद्धालुओं की सुविधा एवं दुर्घटना रहित आयोजन को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है। प्रभारी अधिकारी आपदा एडीएम वित्त प्रमोद कुमार ने अपील की है कि केवल निर्धारित एवं सुरक्षित घाटों पर ही पूजा करें। घाटों पर उतरते समय फिसलन व पानी की गहराई का ध्यान रखें। बच्चों एवं बुजुर्गों को अकेला न छोड़ें।

उन्होंने कहा कि व्रती पुलिस, गोताखोर, स्वयंसेवक दल व प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत 112 या स्थानीय नियंत्रण कक्ष को जानकारी दें। एंबुलेंस, चिकित्सा दल व फायर सर्विस तत्पर रहें। लाउडस्पीकर से जनसंदेश व दिशा-निर्देश लगातार प्रसारित किए जाए। आतिशबाजी, अस्थायी स्टॉल या बाधा उत्पन्न करने वाले आयोजन की अनुमति नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें