भगवान सूर्य की उपासना का महापर्व 25 अक्तूबर से शुरू हो गया है। चार दिन का पर्व शनिवार को नहाय-खाय के पारंपरिक विधि-विधान से घरों में शुरू हो गया है। छठ पूजा का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक है। इस व्रत में महिलाएं पूरे 36 घंटे तक निर्जला उपवास करती हैं। इस व्रत में भगवान भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा की जाती है।
पहले दिन नहाय-खाय से शुरू हुआ। रविवार को महिलाएं खीर खाने के बाद खरना का प्रसाद वितरण करती हैं। इसके बाद से निर्जला व्रत की शुरुआत हो जाती है। महिलाओं के परिजन सूप को सिर पर रखकर घाटों तक ले जाएंगे। सूप में रोली, सिंदूर, आरता, घी, सुपारी, पान पत्ता, धगी, जायफल, सूखा नारियल, छुआरा, किशमिश, मेवा, अखरोट, दीपक, गाजर, अदरक, सिंघाड़ा, सुथनी, संतरा, सेव, शकरकंद, आंवला, कच्चा बादाम, गन्ना, कच्चा नारियल, गागल, गुड़, गाय का दूध, अरवा चावल, बादाम, आम का लकड़ी, गेहूं और अरवा चावल का आटा, दउरा समेत अन्य पूजा सामानों को शामिल करते हैं। सोमवार की शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगी।
ज्योतिषाचार्य हृदय रंजन शर्मा ने कहा कि छठ पूजा के महत्व और परंपराओं से संबंधित अनेक लोक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें से एक लंका विजय के बाद राम राज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता के उपवास रखने के विषय में है।