इस विषय में जिला पुलिस के साइबर विशेषज्ञ सुरेंद्र कुमार बताते हैं कि कानून लागू होने के बाद यह तो गेमिंग कंपनियों ने स्पष्ट कर दिया है, कि जिनकी छोटी रकम 100, 200 या 500, 1000 रुपये तक है वह एप में सुरक्षित है। वह एक आसान प्रक्रिया के बाद वापस हो सकती है। मगर जो लोग बड़ी रकम लगाकर रियल मनी ऑफरिंग के जरिये रकम फंसाए हुए थे। उनके विषय में कोई तस्वीर स्पष्ट नहीं हैं। रियल मनी ऑफरिंग के जरिये बड़ा जुआ या बड़ा दांव लगाने वाले लोग अपने खाते से एप को लिंक कर खेलते थे। वे बुकी के रूप में ग्रुप बनाकर भी लोगों को खिलवाते थे। वे एक निवेशक के रूप में इस खेल में शामिल रहते थे। उनकी बड़ी रकम मिलने की संभावना बिल्कुल शून्य है। यह बड़ी रकम लोगों की फंसी है।
जिले के अनगिनत खाते भी हुए फ्रीज
साइबर सेल के इंचार्ज राहुल चौधरी बताते हैं कि बेशक यह एप दो दिन पहले बंद हो गए। मगर जो लोग अपने खातों से एप को जोडक़र रियल मनी ऑफरिंग के जरिये दांव लगाते थे। ऐसे बहुत से लोगों के कुछ दिन पहले तक खाते फ्रीज हुए हैं। अपने जिले में ऐसी दो-चार शिकायतें हर दिन आ रही थीं। इसकी वजह में जब जांच की गई तो पता चला कि इन गेमिंग एप में हार जीत की रकम साइबर ठगी के जरिये भी इधर से उधर हो रही थी। जब साइबर ठगी की रकम किसी जीतने वाले के खाते में पहुंची तो उसे मनी ट्रेल में सामने आने पर फ्रीज किया जाता था। अब ऐसी शिकायतें रुकेंगी।
साइबर टीमों ने शुरू की निगरानी
रुपयों की हार जीत वाले गेम बंद होने व कानून बनने के बाद साइबर टीमें भी इस पर निगरानी कर रही हैं। अभी तक अपने जिले से कोई प्रमोटर या एप संचालक सामने नहीं आया है। अगर आता है तो कार्रवाई की जाएगी।