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‘आबाद’ की जगह लिख गया ‘आदाब’, रिहाई अटकी

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क्राइम न्यूज, अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
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राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) में निरुद्ध एक बंदी की हाईकोर्ट के आदेश के बाद रिहाई सिर्फ इसलिए अटक गई कि आदेश की कापी में बंदी के नाम आबाद की जगह आदाब लिखा था।

अब बंदी के अधिवक्ता ने आदेश को संशोधन के लिए हाईकोर्ट भेजा है। वहां से संशोधित आदेश के बाद ही अब बंदी की रिहाई हो सकेगी। यह जिला कारागार में निरुद्ध एक मात्र ऐसा बंदी है जिसको पोस्टल बैलेट से अधिकार मिला है। अगर मतदान वाले दिन से पहले संशोधित आदेश नहीं आता है तो बंदी पोस्टल बैलेट का प्रयोग करेगा।
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कोतवाली के तुर्कमान गेट निवासी आबाद उर्फ इरफान पुत्र नईम खान का नाम मुख्य आरोपी के रूप में ऊपर कोट पर 2017 में जुमे के दिन हुए बवाल में मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया था।

सन 2017 में रक्षाबंधन के दिन रेलवे रोड पर दो भाईयों की हत्या हो गई थी। इसके बाद आने वाले शुक्रवार को ऊपरकोट पर नमाज के बाद बवाल की घटना हुई थी।

इस घटना में आबाद का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया था। बाद में उसे 25 मई 2018 को जेल भेजा गया और एनएसए के तहत कार्यवाही हुई। आबाद की ओर से जमानत के लिए आवेदन किया गया लेकिन जमानत याचिका खारिज होती रहीं। बाद में अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदन किया और वहां से जमानत स्वीकार हुई।
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लेकिन यहां पर आए आदेश की कापी में आबाद नाम आदाब लिख गया। इसके चलते उसकी रिहाई अटक गई। आबाद के अधिवक्ता बिट्टू पाठक ने बताया कि आदेश में नाम संशोधन के लिए हाईकोर्ट भेजा गया है। वहां से संशोधित आदेश आने के बाद रिहाई होगी।
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