न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू के उर्दू विभाग के रिसर्च स्कालर्स एसोसिएशन की ओर से रिसर्च डिवीजन हाल में गोष्ठी हुई। इसमें फ्रांस के मशहूर लेखक प्रो. आलीन-ए-जो लीवरस ने बतौर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
प्रोफेसर आलीन ने कहा कि अलिफ लैला, अलादीन, अली-बाबा चालीस चोर आदि फ्रांस में यतीम कहानियों के नाम से छपी थीं। बाद में वह अरबी भाषा में अनुवाद होकर अरब में प्रसिद्ध हो गई।
डीन फैकल्टी ऑफ आर्ट्स प्रो. मुहम्मद जाहिद ने कहा कि उर्दू भाषा सियासत ने मुसलमानों की भाषा बना दी, जबकि सच्चाई यह है कि उर्दू हिंदुस्तानियों की भाषा है।
उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. सगीर अफराहीम ने कहा कि प्रो. आलीन के आने से दो भाषाओं के बीच बेहतर रिश्ते कायम होंगे। इससे रिसर्च स्कालरों को फायदा होगा।
पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सैयद मुहम्मद हाशिम ने कहा कि इस दौर में कई भाषा जानने वाले को बेहतर मौके मिलते हैं। प्रो. तारिक छतारी, कार्यक्रम प्रभारी प्रो. कमर अलहदा फरीदी ने विचार व्यक्त किए।
लहसुन वफा व अबदुर्रहमान फैसल ने गजलें पेश कीं। इस मौके पर अब्बास रजा, प्रो. जफर अहमद सिद्दीकी, प्रो. मौला बख्श, डॉ. आरिफ हसन खां, प्रोफैसर तारिक सईद, डॉ. फुरकान संभली आदि मौजूद रहे।