सुन्नी-शिया वक्फ बोर्ड का विलय आपस में लड़ाने की साजिश
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
सुन्नी वक्फ बोर्ड व शिया वक्फ बोर्ड के विलय की प्रक्रिया शुरू होने से सुन्नी और शिया समाज के लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। आरोप लगाया है पहले हिंदू-मुस्लिम और अब मुस्लिमों को आपस में लड़ाने की कोशिश की जा रही है।
बता दें कि प्रदेश सरकार में वक्फ राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने कहा था कि काफी समय से शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड के विलय के संबंध में लोगों के सुझाव आ रहे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी मिलने के बाद विलय की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अलीगढ़ के दोनों ही समाज के लोगों ने इस पर गहरा आक्रोश जताया है।
कोई फैसला इंसाफ के खिलाफ नहीं होना चाहिए। जिसके पास जितनी संपत्ति है, उसी के हिसाब से उसे अधिकार मिलना चाहिए। बराबरी की बात मुनासिब नहीं है। सौ आने की बात, दोनों फिरकों में अलग-अलग हिसाब-किताब हैं। - मोहम्मद खालिद हमीद, शहर मुफ्ती
सरकार बेरोजगारी, शिक्षा पर ध्यान देने की बजाय ऐसे मामलों में उलझ रही है, जिससे किसी को फायदा नहीं होने वाला है। पहले हिंदू और मुस्लिम को लड़ाया और अब शिया-सुन्नी को लड़ाने की साजिश की जा रही है। दोनों बोर्ड एक नहीं हो सकते हैं, क्योंकि इनके तौर-तरीके अलग हैं। - मारिया आलम, समाजसेविका
शिया अवकाफ ज्यादा हिस्सा हजरत इमाम हुसैन की अजादारी और शिया मदरसों में तालीम लेने वाले बच्चों पर खर्च किए जाते हैं, जो शिया अवकाफ की जरूरत है। सरकार के फैसले की निंदा करते हैं। फैसला वापस न लेने पर देशभर में इसके खिलाफ आवाज उठेगी। - नादिर अब्बास नकवी, सचिव अंजुमन तंजीमुल अजा
सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड को जो मिलाने की कवायद की जा रही है, वह नाकाबिले बर्दाश्त है। सरकार की मंशा को समझना जरूरी है कि आखिर वह चाहती क्या है? जब दोनों समाज के तौर-तरीके अलग हैं, तो एक कैसे हो सकते हैं। - गुलजार अहमद, समाजसेवी
विलय के संबंध में क्या कहता है एक्ट
वक्फ एक्ट 1995 के मुताबिक शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड गठित करने के लिए कुल वक्फ संपत्तियों में किसी एक तबके की कम से कम 15 फीसद हिस्सेदारी जरूरी है। यानी कुल 100 वक्फ संपत्तियां होने पर शिया वक्फ की कम से कम 15 संपत्तियां होनी चाहिए।