कोविंद ने प्रो. शबाहत को सौंपी है धरोहर के संरक्षण की जिम्मेदारी
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
बिहार के पूर्व राज्यपाल एवं राष्ट्रपति पद के राजग प्रत्याशी रामनाथ कोविंद ने एएमयू के सोशल साइंस संकाय के पूर्व डीन प्रो. शबाहत हुसैन को पटना स्थित विश्व प्रसिद्ध खुदाबक्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी में मौजूद हस्तलिपि (मनुस्क्रिप्ट) के संरक्षण की जिम्मेदारी सौंप रखी है।
प्रो. शबाहत हुसैन खुदाबक्श लाइब्रेरी की गवर्निंग बॉडी के सदस्य हैं। उन्हें भारत सरकार द्वारा नियुक्ति किया गया हैं। बिहार के राज्यपाल लाइब्रेरी के चेयरमैन होते हैं।
खुदाबक्श लाइब्रेरी के गवर्निंग बॉडी के सदस्य के रूप में प्रो. शबाहत हुसैन कई बार राज्यपाल रामनाथ कोविंद से मिल चुके हैं। बिहार का राज्यपाल बनने के बाद उन्होंने लाइब्रेरी एवं लाइब्रेरी में मौजूद ऐतिहासिक महत्व के हस्तलिपियों के संरक्षण को लेकर काफी प्रयास किये। हस्तलिपि के संरक्षण के लिए उन्होंने प्रो. शबाहत हुसैन की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बनाई और उनकी रिपोर्ट पर कार्यशाला आयोजित कराएं।
लाइब्रेरी को पुन: व्यवस्थित करने का काम भी उन्होंने प्रो. शबाहत हुसैन को सौंप रखी है। उन्होंने लाइब्रेरी में मौजूद हस्तलिपि का डिजिटलाइजेशन का काम शुरू करा दिया है।
प्रो. शबाहत हुसैन कहते हैं कि रामनाथ कोविंद बहुत ही नेक एवं सबको इज्जत व महत्व देने वाले व्यक्ति हैं। वह अपने काम सेक्रेटरी पर नहीं छोड़ते। सारे काम खुद देखते हैं।
सभी से स्वयं मिलते और मशविरा करते है। प्रो. शबाहत कहते है कि राज्यपाल बनने के बाद लाइब्रेरी से संबंधित बैठक राजभवन में स्वयं लेते थे। इसी महीने 12 जून को लाइब्रेरी की नई बिल्डिंग का उद्घाटन किया।
इंडियन लाइब्रेरी एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. शबाहत हुसैन ने बताया कि खुदाबक्श लाइब्रेरी हस्तलिपि के मामले में देश में सबसे बड़ी लाइब्रेरी है। उसमें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व के करीब 21 हजार हस्तलिपि मौजूद हैं।