जिला अस्पताल के लैब तकनीशियन रतन गुप्ता ने बताया कि संक्रमित रक्त में सोडियम हाइपोक्लोराइट डालकर उसे ऑटो क्लैब मशीन में उबालकर वायरस को नष्ट किया जाता है। उसके बाद रक्त को बायोमेडिकल वेस्ट में भेज दिया जाता है।
जिला अस्पताल में हर साल पहुंचते हैं 300 मरीज
जिला अस्पताल में साल में करीब 250 मरीज हेपेटाइटिस बी के और करीब 50 मरीज हेपेटाइटिस सी से ग्रसित होकर आते हैं। पं. दीनदयाल अस्पताल की पैथ लैब में पिछले दो माह में खून की जांच कराने आए मरीजों में 44 हेपेटाइटिस बी से संक्रमित पाए गए।
हेपेटाइटिस के प्रकार व कैसे फैलता है
हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई प्रकार का होता है। हेपेटाइटिस बी और सी के चलते यकृत का कैंसर, सिरोसिस, यकृत फेल भी हो सकता है। ये ज्यादातर दूषित थूक, बलगम या पेशाब के संपर्क में आने से फैलता है। असुरक्षित इंजेक्शन, संक्रमित रक्त, असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित मां से बच्चे में फैलता है। हेपेटाइटिस फैलने की एक वजह दूषित जल भी है।
हेपेटाइटिस के लक्षण
बुखार, कमजोरी, भूख की कमी, दस्त, उल्टी, पेट में दर्द, गहरे रंग का पेशाब, पीलिया (त्वचा और आंखों के सफेद भाग का पीला होना)