न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
हम भाग्यशाली हैं क्योंकि भारत धार्मिक सहिष्णुता के लिए जाना जाता है। इस महान देश में प्राचीनकाल न केवल कई विश्व धर्मों का जन्म स्थान है बल्कि यह हमेशा नए धर्मों को भी गले लगाता है। यह बात मदरसतुल उलूम अल-इस्लामी के प्रधानाचार्य डॉ. तारिक अयूबी नदवी ने धार्मिक सहिष्णुता विषय पर आयोजित व्याख्यान में कही। कार्यक्रम का आयोजन एएमयू के केए निजामी सेंटर फॉर कुरानिक स्टडीज द्वारा किया गया था।
उन्होंने कहा कि धार्मिक सहिष्णुता इस्लाम और अन्य धर्मों की शिक्षाओं की जड़ है और यह एक साथ रहने के लिए विभिन्न धर्मों, जाति, पंथ, त्वचा के रंग और जातीय पृष्ठभूमि के लोगों को बनाता है।
डॉ. नदवी ने कहा कि ‘मुसलमानों के पैगंबर मुहम्मद साहब के पद चिन्हों का अनुकरण करने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि वे उत्कृष्ट चरित्र, दुनिया के लिए एक एकीकृत कारक थे। पैगंबर ने लोगों को युद्ध छोड़ने और शांति में रहने के लिए सिखाया। केंद्र के निदेशक प्रो. अब्दुर रहीम किदवई, हरिस बिन मंसूर, अरशद इकबाल आदि मौजूद थे।