न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
वो तीनों अनाथ और बेसहारा थे। मां-बाप का साया बचपन में ही उठने के बाद से तीनों एक दूसरे की अंगुली पकड़कर किसी तरह जिंदगी की गाड़ी चला रहे थे। बड़ा भाई प्रदीप ताला फैक्ट्री में चाभी बनाकर किसी तरह अपने दो छोटे भाइयों का भरण-पोषण कर रहा था। एक नानी बची है, वह भी समय-समय पर बस उनकी देखभाल के लिए ही आ पाती हैं। यह व्यथा है बेगपुर गली नंबर तीन निवासी तीन नाबालिग भाइयों प्रदीप, भीमसेन एवं उपेंद्र की।
इन तीनों बच्चों को लेकर सोमवार को जिला महिला एवं बाल कल्याण अधिकारी स्मृति सिंह बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नीरा वार्ष्णेय व राशन डीलर बेगपुर के साथ कलक्ट्रेट स्थिति सभागार पहुंची। उनकी व्यथा सुनकर डीएम चंद्रभूषण सिंह ने न केवल उनकी आर्थिक सहायता के लिए लोकवाणी मद से एक लाख रुपये का चेक दिलाया, बल्कि तहसीलदार को संरक्षक बनाते हुए एलडीएम को इस एक लाख रुपये की फिक्स डिपॉजिट कराने एवं बीएसए को इनके सरकारी स्कूल में दाखिले, यूनिफार्म, पाठ्य पुस्तकों का प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं।
श्रम विभाग को उन्हें बाल श्रमिकों के लिए संचालित योजनाओं का लाभ दिलाने को कहा है। महिला एवं बाल कल्याण अधिकारी स्मृति सिंह ने बताया कि पूर्ति विभाग की निरीक्षक स्मृति गौतम पिछले दिनों इन बच्चों की नानी के गांव ऊंटासानी गई थीं। वहां उनकी नानी ने इन तीनों अनाथ बच्चों के बारे में जानकारी दी।