क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
पुलिस में सिपाही और दरोगा की भर्ती के लिए शारीरिक परीक्षा के जो मानक हैं उनमें सबसे कठिन पांच किलोमीटर की दौड़ है जिसे निर्धारित समय 25 मिनट में पूरा करना होता है। इस स्थिति में जब से भर्ती के लिए शारीरिक परीक्षा की प्रक्रिया शुरू हुई है तब से अब तक 27 अभ्यर्थी बेहोश हो चुके हैं। ध्यान देने की बात यह है कि पुलिस की दौड़ में चार जुलाई को दो लड़कियां, पांच जुलाई को दस लड़के व शनिवार को 15 लड़के धूप में दौड़ने की वजह से बेहोश हो चुके हैं।
रामघाट रोड पर स्थित पीएसी के मैदान में पांच किलोमीटर दूरी के लिए अभ्यर्थी को आठ चक्कर लगाने होते हैं। इस दौरान अभ्यर्थी के सेंसर लगा दिया जाता है जिससे वह टाइमिंग में छेड़छाड़ नहीं कर सके। साथ ही उसकी मानीटरिंग की जा सके। लेकिन इस समय उमस भरी गर्मी ने अभ्यर्थियों के लक्ष्य को कुछ और कठिन कर दिया है।
पुलिस विभाग की टीम में शामिल डॉ. प्रवीन गर्ग ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम ने पुलिस के अधिकारियों को धूप में नहीं दौड़ाने का सुझाव दिया था। लेकिन अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया। इस समय उमस भरी गर्मी सामान्य व्यक्ति का ही बुरा हाल कर रही है।
मलखान सिंह जिला अस्पताल के डा. यशपाल रावल कहते हैं कि हम तो सामान्य व्यक्ति को भी गर्मी के दिनों में शारीरिक श्रम करने से बचने की सलाह देते हैं। बताते चलें कि उत्तर प्रदेश में 3307 पदों पर दरोगाओं की भर्ती होनी है। इसके लिए होने वाली शारीरिक मानक परीक्षा फैजाबाद, अलीगढ़, सीतापुर, फतेहपुर में चल रही है।
भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी
भर्ती टीम में शामिल सीओ तृतीय संजीव कुमार दीक्षित ने बताया कि किसी को शारीरिक समस्या आने पर पूरी भर्ती प्रक्रिया कैसे रोकी जा सकती है। रविवार को अगर अभ्यर्थियों की संख्या मौजूद होगी तो प्रक्रिया जारी रखी जाएगी। किसी भी अभ्यर्थी की भर्ती तभी होगी जब वह मानक पूरे करेगा। जो लोग मानक पूरे ही नहीं कर पा रहे हैं तो वह सलेक्ट कैसे होंगे। साथ ही यह कि पुलिस के इंतजाम के कारण व्यवधान हीं हुआ है। यह किसी की शारीरिक परेशानी हो सकती है।
क्या होता है जब हम दौड़ते हैं
मलखान सिंह जिला अस्पताल के डॉ. यशपाल रावल कहते हैं कि जब हम दौड़ लगा रहे होते हैं तो हमारे हार्ट को शरीर के अंगों को और ज्यादा रक्त की आपूर्ति करनी होती है। साथ हमारे फेफड़ों को भी अधिक आक्सीजन और आपूर्ति किए जा रहे रक्त में देनी होती है। जब शरीर के अंग अतिरिक्त काम कर रहे हों तो उन अंगों को अधिक ऊर्जा पहुंचाने के लिए शरीर के अन्य संबंधित अंग अधिक सक्रिय हो जाते हैं। इस तरह पूरा शरीर सक्रिय काम करने लगता है। जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इस बढ़े हुए तापमान को नियंत्रित करने के लिए पसीना आता है जिससे शरीर को पानी और ग्लूकोज की और आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में अगर इनकी कमी हो जाए तो स्थिति बिगड़ जाती है।
दौड़ पर क्यों अभ्यर्थी इतना जोर देते हैं
भर्ती के दौरान 5 किलोमीटर की दौड़ लगभग 25 मिनट में पूरी करनी होती है। लेकिन यह दूरी जितने कम समय में पूरी कोई अभ्यर्थी करेगा उसे उतने ही अच्छे मार्क्स मिलेंगे। इस परीक्षा में इस श्रेणी में काफी मार्क्स दौड़ से कवर किए जा सकते हैं। इसलिए प्रत्येक अभ्यर्थी चाहता है कि वह कम से कम समय में दौड़ पूरी कर ले जिससे उसे अधिक से अधिक मार्क्स मिल जाएं और उसकी मेरिट ऊपर चली जाए।
इलाज के दौरान ही रोने लगे
भर्ती प्रक्रिया के दौरान दौड़ में बेहोश अभ्यर्थी जब दीन दयाल अस्पताल आए तो नान क्वालीफाई होने की आशंका के चलते वह इलाज के दौरान ही रोने लगे। डाक्टरों ने उन्हें सांत्वना दी। लेकिन उन्हें अब लग रहा था कि वह घर पर क्या कहेंगे। क्यों चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए।