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आजमीन हज मदीना मुनव्वरा में गुलाम बनकर हाजिर हों

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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मस्जिद ईदगाह जमालपुर में रविवार को हज प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसका शुभारंभ हाफिज जाकिर हुसैन की तिलावते कुरान से हुआ।

जाकिर हुसैन ने हज यात्रा में साथ ले जाने वाले सामान के विषय में बताया। प्रशिक्षण विशेषज्ञ डॉ. फैजान अहमद खान ने मॉडल और फ्लैश के माध्यम से वहां आने वाली असुविधाओं एवं कठिनाइयों से अवगत कराया। एएमयू में शिक्षक डॉ. खान ने कहा कि हज यात्रियों के लिए जरूरी है कि वह हज संबंधी निर्देशों का पालन करें ताकि हज कार्य सुन्नत के मुताबिक हो सके।

डॉ. खान ने कहा कि जो पहले मदीना जाएंगे वह दिल्ली हवाई अड्डे से अहराम नहीं पहनेंगे। बल्कि मदीना मुनव्वरा में रहने के बाद जब मक्का के लिए प्रस्थान करेंगे तब जूल हलीफा के स्थान पर अहराम पहनेंगे। जिन लोगों की उड़ान दिल्ली से जद्दा के लिए होगी उन्हें हवाई अड्डे पर ही अहराम बांधना होगा और मक्का पहुंचकर उमरा अदा करना होगा।
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मसजिद पहुंच कर हजरे अस्वद के सामने खड़े होकर इस्तीलाम करके पवित्र काबा के साथ तवाफ करना होगा। इससे पहले अहराम की चादर इस तरह कांधे पर डालें की दाया कंधा खुला रहे और दाएं बगल के नीचे से चादर निकाल कर बाएं कंधे पर डाल दें। इसको इस्तिबा कहते हैं।
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शुरू के तीन चक्करों में रमल करना है (थोड़ा अकड़ कर पहलवानों की तरह चलना है) बाकी चार चक्करों में सामान्य तरीके से चलना है। सात चक्कर लगाने हैं। इस तरह डॉ. खान ने हज की अन्य रस्मों के विषय में भी बताया। कार्यक्रम में अंत में हाफिज जाकिर ने अपने देश भारत में सुख शांति की दुआ की। इस अवसर पर अलहाज असलम, अलहाज शरीर, डॉ. अकिल जराह आदि मौजूद थे।
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