रोडवेज बसों का समय निर्धारित हो तो बने बात
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
गांधी पार्क बस स्टैंड पर जाम की समस्या भले ही सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही है, लेकिन अधिकारी चाहे तो यह समस्या कुछ हद तक खत्म हो सकती है।
बस स्टैंड पर आने वाली बसों और उनके रुकने का अभी तक कोई समय निर्धारित नहीं है। राजस्थान समेत अन्य प्रदेशों में यह व्यवस्था लागू है। यहां बस स्टैंड पर आने वाली प्रत्येक डिपो की बस का समय निर्धारित है।
अपने निर्धारित समय पर यदि गाड़ी आ गई तो उसे बस स्टैंड पर सवारी भरने दी जाती है, समय समाप्त होने के बाद आने वाली गाड़ियों को बस स्टैंड के अंदर नहीं घुसने दिया जाता है।
कुछ इसी तरह की व्यवस्था गांधी पार्क बस स्टैंड के कर्मचारी एवं अधिकारी भी चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने क्षेत्रीय प्रबंधक अतुल त्रिपाठी, एआरएम बुद्ध विहार योगेंद्र प्रताप सिंह को कई बार पत्र लिखा, लेकिन उनकी समस्या की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
बस स्टैंड पर व्यवस्थाएं देखने वाले विभागीय अधिकारी ने बताया कि चूंकि यार्ड छोटा है अत: एक साथ आने वाली बसों को यार्ड में स्थान नहीं मिल सकता है।
साथ ही कौन सी डिपो की बस कितनी देर तक यार्ड में खडे़ होकर सवारियां भरेगी इसका भी समय निर्धारित नहीं है। यही कारण है कि बसें सड़क किनारे खड़े होकर सवारियां भरती हैं और जाम का कारण बनती हैं।
राजस्थान समेत अन्य प्रदेशों का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां रोजाना सभी डिपो की बसों के आने का टाइम रोजाना भेजा जाता है। उसी के आधार पर बस स्टैंड प्रभारी बस को कितनी देर तक सवारी भरने की अनुमति देगा यह तय होता है।
यदि अपने निर्धारित समय के बाद बस पहुंचती है तो उसे सवारी भरने की अनुमति नहीं दी जाती क्योंकि उसका स्थान अन्य डिपो की बस सवारी भरने के लिए खड़ी होती है।
यदि वह अपने निर्धारित समय से कुछ बचे टाइम में पहुंचती है तो उसे उतना ही टाइम दिया जाता है। बसों के आने व जाने का ब्यौरा रखने वाला कोई रजिस्टर भी गांधी पार्क बस स्टैंड पर नहीं है। बस चालक-परिचालक अपने आने की सूचना पूछताछ विभाग को देकर गंतव्य स्थान की आवाज लगवा देते हैं।
अभी हाल ही में बस स्टैंड का निरीक्षण किया था। निर्माण कार्य कर रही कार्यदायी संस्था के पदाधिकारियों ने 15 जुलाई तक बिल्डिंग निगम को सौंपने का वायदा किया है। इसके बाद ही यह व्यवस्थाएं लागू हो पाएंगी।
अतुल त्रिपाठी, क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज