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कल घट स्थापना से शुरू होंगे नवरात्र, श्रद्धालु करेंगे देवी के स्वरूपों की पूजा

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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कल (शनिवार) से घट स्थापना से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। ऐसे में प्रथम दिन श्रद्धालु अपने घरों, प्रतिष्ठानों में घट की स्थापना करेंगे। इसके बाद शुरू होगा देवी के स्वरूपों की पूजा का सिलसिला। शहर के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ के मद्देनजर विभिन्न व्यवस्थाएं की जा रही हैं। प्रसिद्ध नौरंगाबाद नवदुर्गा मंदिर में आयोजित मेले में अधिक भीड़ होती है। ऐसे में वहां बैरीकेटिंग, सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था की जा रही है। मंदिर महंत छोटू महाराज ने बताया कि प्रशासन से पुलिस बल भी मांगा गया है।

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि शनिवार प्रतिपदा तिथि से नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं। जो कि 14 अप्रैल रामनवमी तक जारी रहेंगे। हालांकि 13 अप्रैल को रामनवमी है, लेकिन उदया तिथि के चलते 14 को भी रामनवमी मनाई जाएगी। नवरात्र में देवी स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस कारण शहर के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है।
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इसके चलते इन मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। नौरंगाबाद नवदुर्गा मंदिर में मेला लगता है। इसके चलते यहां कड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर पूजा स्थल तक कई सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। बैरीकेटिंग की व्यवस्था की गई है। मंदिर महंत के अनुसार पुलिस बल भी मांगा गया है। ताकि यहां किसी श्रद्धालु को कोई परेशानी न हो।
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यह है घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
इस बार घट स्थापना का अति शुभ मुहूर्त नौकरी पेशा व्यक्तियों के लिए सुबह 07: 45 से 09:15 तक रहेगा। इस समय विश्व प्रसिद्ध चौघड़िया मुहूर्त के अनुसार शुभ का चौघड़िया मुहूर्त चल रहा होगा। जो नौकरी, धंधे में उन्नति व लाभ का सूचक है। इसके बाद दो बहुत ही शानदार चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। जो घरेलू एवं व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए बहुत ही शानदार पूजा पाठ के मुहूर्त रहेंगे। जिसके तहत दोपहर 12:25 से दोपहर 2:00 बजे तक चल लाभ के विश्व प्रसिद्ध चौघड़िया मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त बेला उपलब्ध रहेंगे। जिनमें पूजा पाठ करने से विद्यार्थियों को व्यापारियों एवं शादी विवाह योग्य लड़का लड़कियों एवं गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए विशेष रूप से कहलाए जाएंगे।

इस प्रकार होगी देवी स्वरूपों की पूजा

06- प्रतिपदा तिथि, घटस्थापना, श्री शैलपुत्री पूजा।
07- द्वितीया तिथि, श्री ब्रह्मचारिणी पूजा।
08- तृतीय तिथि, श्री चंद्रघंटा पूजा।
09- चतुर्थी तिथि, श्री कुष्मांडा पूजा।
10- पंचमी तिथि, श्री स्कंदमाता पूजा।
11- षष्ठी तिथि, कात्यायनी पूजा।
12- सप्तमी तिथि, श्री कालरात्रि पूजा।
13- अष्टमी एवं नवमी तिथि, श्रीरामनवमी व महा अष्टमी पूजा, सरस्वती पूजा
14- रामनवमी पूजा।
नोट:- उदया तिथि के हिसाब से 14 अप्रैल को भी कुछ विद्वान लोग नवमी तिथि मानेंगे। इस कारण इस दिन भी रामनवमी मान्य होगी।
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