क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
थाना बरला क्षेत्र के गांव गाजीपुर में पांच साल पहले हुए मांगेराम हत्याकांड में एडीजे-2 सुरेंद्र सिंह की अदालत ने दो अलग-अलग हिस्सों में फैसला सुनाते हुए सात आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। मामले में पशु चोरी के शक में ग्रामीणों ने सभी आरोपियों पर हमला बोल दिया था। इस दौरान मांगेराम की मौत हो गई थी व अन्य दो घायल थे।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनल कुमार गुप्ता ने बताया कि बरला क्षेत्र के गांव गाजीपुर में जून 2014 की रात तीन लोग खेतों से गुजर रहे थे। ग्रामीणों ने पशु चोर समझकर उनका पीछा कर तीनों को पकड़ लिया। उनके साथ मारपीट कर दी। इस दौरान मांगेराम पुत्र गोपाली निवासी जरगवां बुलंदशहर की मौत हो गई थी। उसके अन्य दो साथी घायल हो गए थे। इस मामले में मृतक के पिता गोपाली ने श्यामलाल पुत्र रूपराम, सिंघवीर व राजकुमार पुत्र एदल गिरि, महीपाल पुत्र नवाब सिंह, भगवती पुत्र बांकेलाल, गुड्डू सिंह पुत्र महेंद्र सिंह, मुकेश पुत्र मुंशी सिंह निवासी गाजीपुर समेत आठ लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। दोनों घायलों को गवाह बनाया था।
विवेचना में एक व्यक्ति का नाम निकाल दिया था। सात लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल हुई। सुनवाई के दौरान आरोपियों में ही मनमुटाव हो गया। इस वजह से सिंघवीर और भगवती की फाइलें अलग-अलग कर सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान गवाह भी मुकर गए। दो मार्च को कोर्ट ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद साक्ष्यों के अभाव में सिंघवीर, श्यामलाल, राजकुमार व महीपाल को दोषमुक्त कर दिया। इसके बाद मंगलवार को फिर से कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान साक्ष्यों के अभाव में भगवती, मुकेश व गुड्डू को भी दोषमुक्त मानते हुए बरी कर दिया।