न्यूज डेस्क, यतीश शर्मा, अलीगढ़।
मसूदाबाद के स्थान पर सेटेलाइट बस स्टैंड से बसों का संचालन शुरू होने के बाद अब बस स्टैंड की बिल्डिंग टूटने का सभी को इंतजार है। बिल्डिंग टूटने के बाद यहां नई बिल्डिंग तो कुछ सालों में बन जाएगी, लेकिन यहां से बसों का पुन: संचालन संभव नहीं होगा।
यहां बनने वाली बिल्डिंग में अलीगढ़ डिपो के कार्यालय बनाए जाएंगे, जिनमें डिपो की कर्मचारी काम करेंगे, लेकिन इससे पहले वर्तमान में मसूदाबाद बस स्टैंड की बिल्डिंग में काम करने वाले कर्मचारियों की शिफ्टिंग अधिकारियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।
पीपीपी मॉडल (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के तहत मसूदाबाद बस स्टैंड का निर्माण होना है। इसके निर्माण के लिए जुलाई में करीब 35 लाख रुपये की किस्त भी जारी हो गई। शनिवार को मसूदाबाद के स्थान पर सेटेलाइट बस स्टैंड से बसों का संचालन भी शुरू हो गया। इसके बाद कछुआ गति से चल रही मसूदाबाद बस स्टैंड की बिल्डिंग को जल्द तोड़ने की प्रक्रिया ने भी तेजी पकड़ ली है।
बिल्डिंग को टूटने के लिए 19 नवंबर को टेंडर क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय में डाले जाएंगे। इन टेंडरों को तत्काल खोलकर बिल्डिंग तोड़ने की अनुमति परिवहन निगम के अधिकारी देंगे। टेंडर की जानकारी के लिए शनिवार को कई लोग अलीगढ़ डिपो के एआरएम लोकेश राजपूत से भी मिले। उन्होंने सभी को जानकारी देने के बाद क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय भेज दिया।
अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही बिल्डिंग टूटने का काम जारी हो जाएगा। लेकिन इससे पहले मसूदाबाद बस स्टैंड की बिल्डिंग में काम करने वाले कर्मचारियों की शिफ्टिंग सबसे बड़ी परेशानी का सबब बनी हुई है। यहां बने पटलों को वर्कशॉप स्थित बुद्ध विहार डिपो की बिल्डिंग में शिफ्ट करने का अधिकारी मन बना चुके हैं, लेकिन यहां स्थान का काफी अभाव है।
अब ऐसे में किस तरह डिपो के विभिन्न पटलों को बुद्ध विहार डिपो की बिल्डिंग में शिफ्ट कर कार्य किया जाएगा यह देखने वाली बात होगी। एआरएम अलीगढ़ लोकेश राजपूत ने बताया कि 22 तक शिफ्टिंग का कार्य पूरा हो जाएगा।
मसूदाबाद बस स्टैंड पर यह पटल है मौजूद
स्थापना एसएसई, फंड पटल, वेतन, दुर्घटना, एआरएम आफिस, संविदा और स्थाई कर्मचारियों का स्थापना पटल, डीपीसी (प्रशासनिक पटल), वर्कशॉप स्थापना पटल, शिकायती पटल, संचालन पटल, डिस्पेंच, डीबीआर, कैश रूम, चेकिंग, डेगवाइज (मैनुअल टिकट व बैग), ईटीएम, एमएसटी/स्मार्ट कार्ड
यह आएगी परेशानी
प्रत्येक पटल के दस्तावेजों को रखने के लिए दो से तीन अलमारी हैं। यहां करीब 16 पटल हैं। इनमें प्रतिदिन कर्मचारी एवं बाबू काम करते हैं। इनका सामान एक साथ बुद्ध विहार डिपो स्थित बिल्डिंग में जाएंगे। इसके बाद कौन सी फाइल कहां रखी है यह खोजना कर्मचारियों के लिए काफी सिर दर्द पैदा करेगा। साथ ही फाइल गायब करना भी कर्मचारियों के लिए आसान होगा और शिफ्टिंग का बनाकर वह साफ बच जाएंगे।
इससे मिलेगा कुछ हद तक समाधान
बुद्ध विहार वर्कशॉप जाने वाले विभिन्न पटलों में से एमएसटी/स्मार्ट कार्ड, चेकिंग, डेगवाइज, ईटीएम और चेकिंग पटल यदि गांधी पार्क बस स्टैंड पहुंच जाएं तो समस्या कुछ हद तक आसान हो सकती है। साथ ही गांधी पार्क बस स्टैंड पर जिस मार्ग की भीड़ होगी उसी मार्ग के लिए किसी भी गाड़ी की ईटीएम में रूट फीट करके उसे भेजा जा सकता है। स्मार्ट कार्ड बनाने का पटल गांधी पार्क पहुंच जाए तो लोगों को कार्ड बनवाने में आसानी होगी। यदि यह वर्कशॉप स्थित बुद्ध विहार डिपो की बिल्डिंग में पहुंचे तो लोगों को परेशानी ज्यादा सामना करना पड़ेगा।