न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी में शुक्रवार की रात कृष्णांजलि नाट्यशाला में कविता और सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से राष्ट्रवाद को जीवंत किया गया। यहां पर एक शाम राष्ट्र के नाम विषय से राष्ट्रीय कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक प्रस्तुति का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन विधायक संजीव राजा और विधायक अनिल पाराशर ने दीप प्रज्वलित करके किया। कार्यक्रम संयोजक और संचालन कर रहे कवि वेद प्रकाश मणि ने कविता प्रस्तुत की ‘ज्ञान भी वंदे मातरम, विज्ञान भी वंदे मातरम, भगवान भी वंदे मातरम, ईमान भी वंदे मातरम, भोर की पहली किरण को जल अर्पण वंदे मातरम, भारत की इस माटी का कण कण वंदे मातरम’ जिसे श्रोताओं ने बेहद सराहा।
ओजस्वी कवि हरीश बेताब ने पढ़ा कि हर हिंदू का सीना तब और तन जाता है, जब भी कोई मुसलमान अब्दुल हमीद हो जाता है। इसके अलावा दिल्ली से आए राधेश्याम बंधु, कासगंज से आई समीक्षा सिंह जादौन, वराणसी से आईं डॉ. ममता वार्ष्णेय, अलीगढ़ के अशोक अंजुम, बरेली के डॉ. मुकेश मीत, तेजवीर त्यागी ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। देर रात तक श्रोता कविताओं के सागर में गोता लगाते रहे।