डेस्क न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने कहा कि अकबर के युग में समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सहिष्णुता थी। एक सुदृढ़ आर्थिक व्यवस्था थी, जिसमें व्यापार का विस्तार हुआ तथा सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहन प्राप्त होता रहा।
प्रो. इरफान हबीब एएमयू इतिहास विभाग के सेंटर फॉर एडवांस स्टडी में ‘अकबर तथा उसका भारत’ विषय पर आयोजित सिम्पोजियम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अकबर ने श्रद्धा पर बुद्धि को प्राथमिकता दी। हमें यह समझने की आवश्यकता है कि उन दिनों में इस्लाम की छवि आज से काफी भिन्न थी। प्रो. शीरीं मूसवी ने ‘अकबर सुधारक के रूप में’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अशोक की भांति अकबर भी भारतीय इतिहास पर प्रभाव डालने वाला बड़ा व्यक्त था। उन्होंने कहा कि अकबर ने कर इसलिये समाप्त कर दिया था कि गरीब व्यक्तियों का उसे चुकता करना कठिन होता था। प्रो. शीरीं मूसवी ने कहा कि अकबर ने 1562-63 में गुलामी पर पाबंदी लगा दी थी तथा स्वतंत्र किये गये गुलामों के लिये वजीफा प्रारंभ किया। इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. अली नदीम रेजावी ने कहा कि अकबर सहिष्णुता में विश्वास करने वाला शासक था, जिसने वास्तविकता तक पहुंचने के लिये विभिन्न धर्मों के लोगों के साथ चर्चा की।