न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
डीएस कालेज के सभागार में अनुभूति नाट्य अकादमी कानपुर द्वारा असगर वजाहत के मशहूर नाटक ‘जिस लाहौर नइ देख्या ओ जम्याई नइ’ का मंचन स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किया। इसमें कमिश्नर अजय दीप सिंह, जिलाधिकारी की धर्मपत्नी डॉ. अंजना सिंह सेंगर, अलका अग्रवाल विशिष्टि अतिथि के रूप में शामिल रहीं।
मंडल आयुक्त ने दिल की दुकान तथा जिस लाहौर नइ देख्या ओ जम्याई नइ दोनों ही नाटकों की श्रेष्ठ समीक्षा की। जिस लाहौर नइ देख्या ओ जम्याई नइ के निर्देशन रतन राठौर ने किया। यह नाटक सन 1947 के विभाजन पर आधारित कहानी, जिसमें भाई भाई से अलग, कत्ले आम हुआ, मां बहनों की अस्मत का खुलेआम नंगा नाच हुआ, चारों तरफ मार-काट, खून-खराबा और तबाही हुई।
सिकंदर मिर्जा का परिवार लखनऊ से लाहौर गया। लाहौर में जो उसे घर रहने को मिला उसमें हिंदू पंजाबी बुजुर्ग महिला रह रही थी। हवेली रतन लाल जौहरी की थी। आरंभ में सिकंदर मिर्जा का परिवार बुजुर्ग महिला को मारना चाहता था, लेकिन धीरे धीरे दोनों परिवार में मेल मिलाप बढ़ गया और एक परिवार के समान रहने लगे। दोनों परिवार त्योहार साथ मनाने लगे। कट्टर मुसलमान की बातें मिर्जा साहब को डिगा नहीं पाई।
रतन लाल जौहरी की मां के इंतकाल पर सिकंदर मिर्जा ने हिंदू रीति-रिवाज से दाह संस्कार किया। हिन्दू-मुस्लिम एकता पर आधारित नाटक दर्शकों के दिलों में न भुला देने वाला स्थान बना गया। मुख्य पात्र रूपानी मिश्रा (रतन की मां), वही उल्लाह खान (सिकंदर मिर्जा) आशुतोष पांडेय (पहलवान) प्रिया वर्मा (बेगम मिर्जा), योगेन्द्र श्रीवास्तव (मौलवी), मुरारी गौड़ (अलीना चाय वाला), अतिन अवस्थी (जावेद) की भूमिका में रहे।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डा. हेम प्रकाश, राजीव अग्रवाल ‘अनु’ सचिव, महेश नंदन अग्रवाल, अध्यक्ष, राज कुमार अग्रवाल, मनोज कुमार सिंघल, राजीव अग्रवाल प्लस प्वाइंट, कुंवर बहादुर अग्रवाल, संरक्षक, प्रबन्ध समिति, सुरेश गोविल, सदस्य प्रबन्ध समिति डॉ. बीना अग्रवाल, डॉ. सुभाष चौधरी, डा. अतुल मित्तल, डा. रेनू सिंघल, डा. सुनीता गुप्ता, डा. मुकेश भारद्वाज, डा. प्रबोध श्रीवास्तव आदि मौजूद थे।