क्राइम डेस्क, अमर उजाल, अलीगढ़।
साहब हम तो घर के रहे न घाट के। सभी ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए 14वें आयोग की धनराशि मिल गई है। बैठकें होकर प्रस्ताव तक पारित हो गए हैं। लेकिन हमें कुछ नहीं मिला। हमारी ग्राम पंचायतों में तमाम समस्याएं हैं। बजट न होने के कारण हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं। आप ही कुछ समाधान कराओ।
यह व्यथा है नगर निगम की सीमा में शामिल हुए विकास खंड जवां एवं लोधा के ग्राम प्रधानों की। नगर निगम की सीमा में आने के कारण उन्हें ग्राम पंचायत निधि से तो वंचित होना पड़ रहा है। नगर निगम भी शासन स्तर से वार्ड के रूप में इन पंचायतों को निगम में शामिल होने के इंतजार में विकास कार्यों से परहेज कर रहा है।
बताते चलें कि नगर निगम के सीमा विस्तार में आसपास की 19 ग्राम पंचायतें शामिल की गई हैं। इसके बाद नगर निगम ने जिला पंचायत राज विभाग को इन ग्राम पंचायतों में राज्य वित्त एवं अन्य मदों से विकास कार्य कराने को मना कर दिया है।
जबकि नगर निगम को अभी शासन स्तर से इन ग्राम पंचायतों के वार्डों में तब्दील होने के घोषणापत्र का इंतजार है। इस मामले 13 गांव पंचायतों जवां की धौर्रामाफी, महेशपुर, रामगढ़ पंजूपुर, मंजूरगढ़ी, लोधा की ग्राम पंचायत बरौला जाफराबाद, सारसौल, जलालपुर गड़िया, ऐलमपुर, अलापुर गड़िया, रोरावर, कस्बा कोल, क्वारसी, नगला मान सिंह के प्रधान शहरबानो, प्रधान सर्वेश देवी, सावित्री देवी, योगेश्वर, सुनीता देवी, राजवती देवी, कांति प्रधान, रंजना देवी, रुपा यादव आदि ने मुख्य विकास अधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
मुख्य विकास अधिकारी दिनेश चंद्र ने बताया कि राज्य वित्त आयोग की राशि को रोका नहीं गया है, बल्कि यह शासन से ही नहीं आई है। इस मामले को कार्रवाई के लिए शासन के पास भेजा जाएगा। जनपद स्तर पर जिला पंचायत राज विभाग एवं नगर निगम के अधिकारियों के साथ बैठक कर आपसी समन्वय से विकास कार्य कराने को कहा जाएगा।