मौसम का बदला मिजाज तो तबियत भी हुई नासाज
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
पिछले तीन दिनों में अचानक मौसम का मिजाज बदलने से लोगों की, खास तौर से बच्चों और वृद्धों की तबियत खराब हो रही है। मलखान सिंह जिला अस्पताल, दीन दयाल अस्पताल सहित निजी क्लीनिकों पर मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। मंगलवार को भी पूरे दिन धूप नहीं निकली। इससे मौसम में सर्द अहसास रहा।
मलखान सिंह जिला अस्पताल के पूर्व वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. यशपाल रावल कहते हैं कि मौसम के बदलाव का यही असर सर्दी, जुकाम और वायरल बुखार के रूप में नजर आता है। नवंबर, दिसंबर, जनवरी ड्राई मौसम होता है। बीमारियों के लिए यही मौसम जिम्मेदार होता है। इस दौरान नाक, कान, गले की एलर्जी, सांस लेते समय छाती में परेशानी, आंखों पर स्ट्रेन, आवाज बैठना, जुकाम व खांसी जैसी बीमारी ज्यादा होती हैं। ये बीमारियां इन दिनों होने वाली आतिशबाजी, फसल की कटाई, शुष्क मौसम, सड़कों पर उड़ती धूल आदि से होती हैं।
वायरल इंफेक्शन
कॉमन कोल्ड या जुकाम - इसमें नाक बंद हो जाती है। छींकें आती हैं। खांसी हो जाती है। गला खराब रहता है और बुखार भी आ जाता है। इसके फैलने का कारण वातावरण में मौजूद वायरस है। जो एक दूसरे में सांस के जरिए छींकने से या खांसने पर फैलता है। हैजा भी वायरस से फैलता है। यह किसी भी मौसम में हो सकता है। डेंगू, मलेरिया, फ्लू, चिकनगुनिया, पीलिया, डायरिया और हेपेटाइटिस भी वायरस से फैलते हैं। जो साल में कभी भी हो सकते हैं। बच्चों में डायरिया फैलने की मुख्य वजह वायरल इंफेक्शन ही है। इसे वायरल डायरिया कहते हैं। सामान्य दर्द और बुखार से लेकर एंकेफ्लाइटिस और मेनिनजाइटिस तक वायरल इंफेक्शन से हो सकता है।
प्रदूषण है वायरस फैलने की वजह
डॉ. रावल कहते हैं कि इन दिनों वातावरण में स्मॉग की एक परत छाई रहती है। इसी हवा में हम सांस लेते हैं। जिसमें हजारों तरह के वायरस होते हैं। भीड़भाड़ वाली जगह पर इकट्ठा होने से भी वायरस फैलता है।
वायरल और फ्लू में क्या फर्क है
वायरल का ही दस गुना बड़ा रूप फ्लू होता है। वायरल में आमतौर पर मरीज बिस्तर नहीं पकड़ता। जबकि फ्लू में अच्छा खासा बुखार आ जाता है। फ्लू तीन से पांच दिन में ही एक इंसान को बेहाल कर देता है। फ्लू में एंटी वायरल दवा दी जाती है। इसका पांच दिन का कोर्स होता है।
बच्चे हो रहे हैं मौसम का सबसे ज्यादा शिकार
अलीगढ़। शहर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मल्होत्रा कहते हैं कि आम भाषा में बोले जाने वाले कॉमन कोल्ड या जुकाम की शुरुआत बच्चों में नाक बहने, छींक, आंखों से पानी आने और हल्की खांसी से होती है। इसे वायरल भी कहते हैं। बड़े लोग तो अपनी बीमारी के बारे में बता सकते हैं, लेकिन दूध पीता बच्चा बोल नहीं पाता। ऐसे बच्चे सांस लेते वक्त आवाजें करते हैं। ऐसा लगता है कि उनकी नाक में ब्लॉकेज है। बच्चा बेवजह रोने लगता है। उसे हल्का बुखार भी हो सकता है। दूसरी ओर ऐसे बच्चे जो बोल सकते हैं, उनमें भी वायरल के वही लक्षण होते हैं।