मक्के के खेत में मिला किशोर का शव
ब्यूरो, अमर उजाला, अतरौली (अलीगढ़)।
कस्बा अतरौली के समीप खेतों में मक्के की खड़ी फसल वाले खेत में 11 वर्षीय किशोर का शव मिलने से सनसनी फैल गई। किशोर के हाथों की दो अंगुलियों पर दांत से काटे जाने के निशान मिले हैं। यह निशान किसी व्यक्ति के दांतों जैसे पुलिस बता रही है। परिजन हत्या की आशंका जता रही है। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
कस्बे के मोहल्ला सराय देवीदास निवासी केशव सैनी सेल्समैन हैं। उनकी पत्नी भावना की चार साल पहले हत्या कर दी गई थी। हत्या के आरोप में केशव के पिता जयकिशोर जेल में हैं। केशव अपने तीन बच्चों जतिन (11), साक्षी (8), विराट (4), मां कुसुम व दादी अनारो देवी के साथ रहते हैं। बुधवार सुबह केशव अलीगढ़ चले गए। तीनों बच्चे घर पर थे।
बताते हैं कि इसी बीच जतिन मुहल्ले के ही सतीश की दुकान पर कुछ सामान लेने गया। उसके बाद नहीं लौटा। सुबह करीब 9.30 बजे घर से करीब दो किलोमीटर दूर सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल से थोड़ी दूरी पर नगाइचपाड़ा के सुरेश जाटव के खेत में खड़ी मक्के की फसल के बीचोंबीच बबूल के पेड़ के नीचे जतिन का शव पड़ा मिला।
खेतों में घास काटने पहुंची महिलाओं ने शव देखा तो सन्न रह गईं। सूचना पर कोतवाल उत्तमचंद पटेल भी पहुंच गए। उसे सीएचसी ले जाया गया, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
खेत के अंदर कैसे पहुंचा किशोर
केशव का बेटा जतिन कक्षा 2 और साक्षी कक्षा 1 में पढ़ते हैं। साक्षी ने बताया कि किताब न होने वह पढ़ने नहीं गए थे। केशव ने बुधवार को किताब लाने की बात कही थी। दोनों बच्चे खुश थे कि शाम तक किताबें आ जाएंगी। वह गुरुवार को पढ़ने जाएंगे। जतिन घर से 10 रुपये का नोट लेकर सतीश की दुकान से कुछ लेने गया था। वह दो किलोमीटर दूर जंगल में फसल के बीचोबीच कैसे पहुंचा, यह सवाल परिवार और गांव वालों को परेशान कर रहा है।
बच्चे उठाने की हो चुकी है कोशिश
कस्बे में कुछ दिन पहले सरायनूर मोहल्ला से अलग-अलग दिनों में दो बच्चों को उठाने की कोशिश हो चुकी है। एक लापता है। एक बच्चे को बदमाश छोड़कर भाग गए थे। चर्चा है कि कहीं बच्चे उठाने वाले गैंग ने तो यह वारदात नहीं की।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा। केशव मजदूरी करता है। उसकी किसी से दुश्मनी नहीं है। हो सकता है बच्चे को किसी विषैले कीड़े ने डस लिया हो। जांच की जा रही है। यह भी जांच का विषय है, कि किशोर खेत में इतनी दूर पहुंचा कैसे? - उत्तमचंद पटेल, कोतवाल