न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
सपा बसपा गठबंधन में 37-37 सीटों का बंटवारा हुआ है। अलीगढ़ संसदीय सीट से किस पार्टी का उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा..? ये 15 जनवरी तक तय हो पाएगा। सपा से पूर्व नगर विधायक जफर आलम ने कहा है कि 15 जनवरी को बसपा सुप्रीमो बहन मायावती के जन्मदिन पर इसकी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। वह भी लखनऊ जाएंगे और पार्टी के आला नेताओं से मुलाकात करेंगे। अगर अलीगढ़ सीट सपा के पास रही तो वह चुनाव की तैयारी करेंगे। अन्यथा जो पार्टी का निर्देश होगा, उस पर काम करेंगे। गौर हो कि जफर आलम वर्ष 2009 और 2014 में दो बार लगातार सपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। वर्ष 2009 में वह दूसरे नंबर पर रहे थे जिसमें बसपा से राजकुमारी चौहान चुनाव जीत गई थीं।
वर्ष 2017 के गठबंधन की यादें फिर ताजा,
बसपा सपा गठबंधन होने के बाद से कांग्रेस सपा का विधानसभा चुनाव का गठबंधन भी चर्चा में आ गया है, जो वर्ष 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में हुआ था। जिसमें सपा और कांग्रेस के बीच कोल विधानसभा सीट फंस गई थी। इस पर कांग्रेस के विवेक बंसल और सपा से अज्जू इस्हाक दोनों चुनाव लड़े थे। जबकि पूरे प्रदेश में दोनों पार्टियां मिल कर ही चुनाव लड़ी थी। इस बार सपा ने बसपा से हाथ मिलाया है। कांग्रेस अभी तक गठबंधन से दूर हैै। ऐसे में सपा कांग्रेस दोनों एक बार फिर से आमने सामने होगी। इसीलिए वर्ष 2017 का गठबंधन फिर से सुर्खियों में है जिसका नाम ‘हटबंधन’ पड़ गया था।
15 जनवरी तक जमीरउल्लाह
भी कर सकते हैं बड़ा धमाका
सपा से दो बार लगातार रहे विधायक हाजी जमीरउल्लाह 15 जनवरी तक लोकसभा चुनाव लड़ने के सिलसिले में कोई बड़ा एलान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि 9 जनवरी बुधवार को उनकी एक पार्टी के आलाकमान से मुलाकात प्रस्तावित है। इसके बाद वो कोई फैसला करेंगे। पूर्व विधायक ने कहा कि वह हर हाल में लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। पार्टी अभी तक तय नहीं है। माना जा रहा है कि हाजी जमीरउल्लाह शिवपाल सिंह यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया से भी टिकट ला सकते हैं। पूर्व विधायक ने कहा है कि वह प्रमुख विपक्षी पार्टियों के आला नेताओं के संपर्क में हैं। जल्द ही इस बारे में फैसला करेंगे।