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हिंसा आधारित राजनीति में कोई भी सुरक्षित नहीं

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गौरी लंकेश हत्या : हिंसा आधारित राजनीति में कोई सुरक्षित नहीं
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की चहुंओर निंदा हो रही है। कोई इस हत्या को देश के लिए शर्मनाक बता रहा है तो कोई इसे पत्रकारिता और सामाजिक कार्यकर्ताओं को आघात बता रहा है।
जनवादी लेखक संघ उप्र की अध्यक्ष नमिता सिंह ने गौरी लंकेश की हत्या के विरोध को देश में लोकतंत्र को बचाए रखने की मुहिम के रूप में देखने की बात कही है। गौरी लंकेश की दिनदहाड़े घर में घुसकर की जाने वाली हत्या को कुछ लोग समाज में होने वाली लूटपाट-हत्या जैसे अपराध की श्रेणी में रखने की कोशिश कर रहे हैं। ये वही लोग हैं, जो असहमति और प्रतिरोध की आवाज को बलपूर्वक दबा देने के हिमायती हैं। राजनैतिक रूप से अगर आप सत्ता-व्यवस्था की नीतियों के आलोचक हैं और विरोधी विचारधारा के हैं तो सत्ता-समर्थकों द्वारा आपकी हत्या होना आज मामूली बात हो गई हैं। गौरी पहले प्रधानमंत्री से लेकर मोदी सरकार की अनेक रीति-नीतियों की वे प्रखर आलोचक रहीं। पिछले कुछ वर्षों से देश और समाज का परिदृश्य बदल गया है। ज्ञान और अध्ययन का क्षरण हुआ है इसीलिए किसी से असहमत होने पर संभ्रांत दिखाई देने वाले लोग भी अब बहस नहीं करते बल्कि सीधे गाली-गलौज करते हैं, जिसके नमूने हमें फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर दिखाई देते हैं। हिंसा आधारित राजनीति में कोई भी सुरक्षित नहीं। जीने का अधिकार और सम्मान की सुरक्षा केवल लोकतंत्र में ही संभव है।
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इनसेट
गौरी लंकेश की हत्या की निंदा
अलीगढ़। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी व भारतीय कम्युनिस्ट पाटी (मार्क्सवादी), अलीगढ़ मेटल इंडस्ट्रीज व उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड फार्मा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ने वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की जघन्य हत्या की निंदा करते हुए कहा कि गौरी भाजपा और आरएसएस के खिलाफ बोलने वाली आवाज थी। पहले गोविंद पंसारे, दाभोलकर, कलबुर्गी और अब गौरी लंकेश। हमने और पत्रकारों ने एक चैंपियन खो दिया है। इकबाल मंद, रनवीर सिंह, हरीश चंद लोधी, इदरीस, बलबीर सिंह, राज कुमार शर्मा, एनके पचौरी, हरीश चंद लोधी, इरफान अंसारी, सोमा, गुलफाम आदि मौजूद रहे।

एएमयू में भी उठी हत्या के विरोध में आवाज
अलीगढ़ । एएमयू के हिंदी विभाग में बुद्धिजीवियों ने कहा कि जुझारू, निडर और निर्भीक पत्रकार गौरी लंकेश की नृशंस हत्या किसी भी देश के लिए अत्यंत शर्मनाक घटना है। इसकी जितनी भी भर्त्सना की जाए कम है। सच से साक्षात्कार कराने वालों को ठिकाना लगाने और निर्लज्जता की सारी सीमाओं का अतिक्रमण कर इसे महिमामंडित करने की यह कौन सी भारतीय संस्कृति है? हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग की गई। प्रो. रमेश रावत, प्रो. कमलानंद झा, प्रो. वेदप्रकाश, प्रो. प्रदीप सक्सेना, प्रो. आशिक अली, प्रो. इफ्फत असगर, प्रो. शंभुनाथ तिवारी, डॉ. गुलाम फरीद साबरी, डॉ. शहबाज अली खान, दीप शिखा सिंह, वाजिद रशीद खां, जावेद आलम, नीलोफर उस्मानी ने घटना निंदा की।
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कांग्रेसियों ने की शोकसभा
अलीगढ़। कांग्रेस नेता व छर्रा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी परवेज अहमद के मेडिकल रोड स्थित कैंप कार्यालय पर वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या पर शोकसभा हुई। शोकसभा में अंसार आलम, भगवती प्रसाद जाटव, तारिक गांधी, इरशाद सलीम, रियाज अहमद खां, आजाद अली, मोहम्मद अरहम खान, राजेश लोधी, मुकेश लोधी, राकेश प्रजापति, जितेंद्र सिंह, हाजी शब्बीर, मोहम्मद अनवार आदि ने शोक जताया।
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