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आरटीओ विभाग को चकमा देने का नया तरीका

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आरटीओ विभाग को चकमा देने का निकाला लिया तोड़
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।

अवैध रूप से संचालित मोटर ड्राइविंग स्कूल सेंटरों के खिलाफ आरटीओ विभाग ने तो कार्यवाही नहीं की, लेकिन ट्रेनिंग संचालकों ने इसका तोड़ अवश्य निकाल लिया। अब सारे नियम और कानून ताक पर रखकर उन्होंने ट्रेनिंग वाहन से अपने स्कूल के नाम का बोर्ड हटा दिया है, ताकि किसी को पता ही न चले कि वाहन ट्रेनिंग सेंटर का है या प्राइवेट।

अमर उजाला ने तीन अगस्त के अंक में ‘ड्राइविंग सीखने में खतरे में जान’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इस ओर ध्यान भी आकर्षित कराया। खबर प्रकाशित होने के बाद अवैध रूप से मोटर ड्राइविंग सेंटर चलाने वालों में खलबली मच गई। कुछेक ट्रेनिंग सेंटर संचालक संस्थाओं से रजिस्ट्रेशन के कागजात लेकर आरटीओ आफिस पहुंचे और अधिकारियों को दिखाएं।
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अधिकारियों ने उन्हें अवैध घोषित तो कर दिया, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की। अब ट्रेनिंग स्कूल के वाहनों पर सेंटर के नाम का बोर्ड हटा दिया गया है, ताकि किसी को पता ही न चले कि यह ट्रेनिंग स्कूल का वाहन है। आरटीओ के स्थानांतरण होने के बाद इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। आरटीओ ने स्वयं भी इस मामले में स्थानांतरण के बाद कोई दिलचस्पी नहीं ली।
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वर्जन
सभी अधीनस्थों को अवैध रूप से संचालित मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर का डाटा एकत्रित कर करने के निर्देश दिए थे। चूंकि इस बीच उनका स्थानांतरण गया तो वह ध्यान नहीं दे पाए।
डा. विक्रम सिंह आरटीओ अलीगढ़
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