न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा 2018 का परिणाम शुक्रवार को जारी हो गया। सूचना पर देर शाम तक सिविल सर्विस की पढ़ाई कराने वाले कोचिंग सेंटर अपने अभ्यर्थियों के चयनित होने के रिजल्ट की बाट जोहते रहे। हालांकि जिले के तीन होनहार अभ्यर्थियों की देर रात तक परीक्षा में चयनित होने की पुष्टि हो गई। जिनमें से एक वर्तमान में मथुरा जिले में वाणिज्य कर अधिकारी है। इस सूचना पर इन परिवारों में जश्न का माहौल है।
जैसे ही शुक्रवार शाम को रिजल्ट जारी हुआ। वैसे ही अभ्यर्थी अपने परिणाम का इंतजार करने लगे। कोचिंग सेंटर अपनी मेहनत को भुनाने के लिए बच्चों से संपर्क साधे हुए थे। हालांकि अधिकतर कोचिंग सेंटर संचालकों ने बताया कि अभी पुष्टि नहीं हो पाई है। शनिवार तक जानकारी हो जाएगी।
एएमयू की रेजीडेंशियल कोचिंग अकेडमी से निकले दो होनहार
एएमयू की रेजीडेंशियल कोचिंग से दो होनहार छात्र निकले हैं। कोचिंग की बुशरा बानो ने 277 वी रैंक हासिंल की है। जबकि मो. हाशिम को 448 वीं रैंक मिली है। डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सगीर अहमद अंसारी ने बताया कि दोनों छात्रों की उपलब्धि पर वह बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि बुशरा आईपीएस बन सकती है। जबकि हाशिम को आईआरएस मिल सकता है। उन्होंने बताया कि हाशिम पिछले साल तक शेरवानी में रहे हैं। इस रिजल्ट से अन्य बच्चे भी प्रोत्साहित होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि 2009 के बाद आरसीए से यह पहला बैच निकला है। बुशरा बानों ने मैनेजमेंट से पीएचडी कर रखा था। इस पर एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने आरसीए और चयनित दोनों बच्चों को बधाई दी है।
वाणिज्य कर अधिकारी हैं सचिन कुमार
कुलदीप विहार निवासी सचिन कुमार पुत्र वीरी सिंह ने 669 वीं रैंक हासिल की है। वह वर्तमान में मथुरा के वाणिज्य कर अधिकारी के पद पर तैनात हैं। 2012 में उनका पीसीएस में चयन हुआ था। इनके बड़े भाई राजेंद्र ने बताया कि सचिन की दिसंबर में ही शादी हुई है। वह प्रारंभ से ही पढ़ाई में काफी दिलचस्पी रखते थे। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार को गर्व है। सचिन के पिता वीरी सिंह पुलिस विभाग में तैनात थे। 2001 में मुठभेड़ के दौरान वह शहीद हुए थे।
राजेश पांडेय की बेटी कीर्ति का भी हुआ चयन
जिले के पूर्व में एसएसपी रहे वर्तमान में डीआईजी बरेली रेंज राजेश पांडेय की पुत्री कीर्ति पांडेय ने दूसरे प्रयास में आईएएस परीक्षा को पास कर लिया है। पहले प्रयास में उन्हें आईआरएस कैडर मिला था। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने फिर से यह मुकाम हासिल कर लिया है।