न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
शहर का ऐतिहासिक नुमाइश मैदान सिर्फ आयोजनों और तमाशे मेले तक ही सीमित नहीं है। बल्कि यह शहर की राजनीतिक गतिविधियां, चुनावी रैलियां और राष्ट्रीय आंदोलनों के बड़े नेताओं की मौजूदगी का भी गवाह रहा है। इस मैदान में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सहित इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, नरेंद्र मोदी तक अपने राजनीतिक अंदाज दिखा चुके हैं। मौजूदा लोक सभा चुनाव में भी इस मैदान में इस बार बड़ी पार्टियों के स्टार प्रचारकों की जनसभा प्रस्तावित है।
बुजुर्ग सामाजिक विचारक हरिश्चंद्र शर्मा कहते हैं कि 1804 में जिला का दर्जा प्राप्त करने वाले अलीगढ़ के पहले कलेक्टर कर्नल रसल थे। लेकिन यहां पर 1873 के आसपास अश्व मेला (घोड़ों की प्रदर्शनी) लगनी शुरू हुई थी। तब यहां पर टेंट आदि लगाए जाते थे। साल दर साल यहां पर होने वाली इस प्रदर्शनी को देखते हुए 1903 में इसे ‘अलीगढ़ डिस्ट्रिक फेयर’ का नाम दिया गया। इसमें एक दरबार हाल बनाया गया, जो आज भी है। राष्ट्रीय आंदोलन के गति पकड़ने के बाद यहां दरबार हाल में महात्मा गांधी ने भी प्रवास किया और करीब आठ दिन रुके। आजादी के बाद यहां इंदिरा गांधी के सन 1971 चुनाव में सभा करने का जिक्र मिलता है।
सामाजिक कार्यकर्ता सुबोध नंदन कहते हैं कि आजादी के बाद अगले दो दशकों तक कांग्रेस को प्रत्याशियों को जिताने के लिए सभा करने की जरूरत ही नहीं होती थी। लेकिन बदलते समय में उस समय तत्कालीन कांग्रेस नेता इंदिरा गांधी को प्रत्याशी के लिए सभा करने आना पड़ा। इसके बाद तो सन 1991 में राजीव गांधी ने विशाल सभा की। मई की गर्मी में भी लोग उन्हें सुनने के लिए खड़े रहे। इसके बाद अपने प्रधानमंत्रित्व काल में अटल विहारी बाजपेयी ने यहां पर सभा की। राहुल गांधी सोनिया गांधी के बाद नरेंद्र मोदी तक इस मैदान में जनता से अपने हाथ मजबूत करने की अपील करने आए।