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जीआरपी बेबस... जिदंगानी पर भारी पड़ रही जल्दबाजी

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अभिषेक तायल
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जागरूकता अभियानों और सख्ती के बावजूद ट्रेन से कटने वाले लोगों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। 25 मार्च को गोमती एक्सप्रेस की चपेट में आकर तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसके बावजूद लोग सजग नहीं हो रहे हैं। लापरवाही व जल्दबाजी मेें लोग रेलवे ट्रैक पार करते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, अलीगढ़ जीआरपी के सर्कुलेटिंग एरिया में वर्ष 2020 से अब तक 27 माह में 164 लोगों की जान जा चुकी है, जिसमें 82 लोगों की पहचान नहीं हो सकी है। ये हाल तब है, जब दो साल तक लॉकडाउन के चलते रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा रहा। मरने वालों में पुरुषों की संख्या ज्यादा है।
राजकीय रेलवे पुलिस के अनुसार, वर्ष 2020 में कुल 54 लोगों की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई, जिनमें 44 पुरुष व 10 महिलाएं शामिल हैं। इसमें 24 लोग अज्ञात हैं। वर्ष 2021 में 89 लोगों ने जान गवाई, जिनमें 77 पुरुष व 12 महिलाएं शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, इनमें 51 लोग अज्ञात हैं। वर्ष 2022 में अब तक तीन महीनों में 21 लोगों को जान जा चुकी है, जिनमें 18 पुरुष व 3 महिलाएं शामिल हैं। सात लोगों शिनाख्त नहीं हो सकी है।
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ट्रैक पर सेल्फी लेने के चक्कर में भी होते हैं हादसे
गतिमान और वंदे भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेनों के दौर में लोग सावधानी नहीं बरत रहे हैं। सबसे ज्यादा शिकार युवा पीढ़ी हो रही है। ग्रीन सिग्नल होने के बाद भी वह लाइन पार करते हैं। रेलवे ट्रैक पर सेल्फी लेना, बंद फाटक के नीचे से दोपहिया वाहन निकालते हैं, इसके परिणाम स्वरूप हादसे का शिकार होते हैं। स्कूली बच्चे व युवा कान में ईयरफोन लगाकर ट्रैक पार करते हैं। हाथरस में कुछ दिन पहले सेल्फी लेते समय दो नाबालिगों की मौत हो गई थी।
सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं रेलवे फाटकों पर
सबसे अधिक दुर्घटनाएं रेलवे फाटकों पर होती हैं। रामघाट रोड स्थित मीनाक्षी पुल पूर्व में खूनी फाटक के नाम से मशहूर था। पला फाटक, जेल रोड फाटक व बरौला फाटक पर भी आए दिन घटनाएं होती रहती हैं। कुछ दिन पहले बरौला फाटक पर तीन लोग ट्रेन की चपेट में आए थे। दो की मौके पर ही मौत हो गई थी। एक ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था।
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27 माह में 259 लोगों को लाइन पार करते पकड़ा
रेलवे सुरक्षा बल ने पिछले 27 महीनों में 259 लोगों के खिलाफ रेलवे ट्रैक पार करने में कार्रवाई की है। ट्रैक पार करने पर रेलवे एक्ट की धारा 147 ए के तहत रेलवे कोर्ट द्वारा चालान व जेल भेजा जाता है। वर्ष 2020 में आरपीएफ ने 160 लोगों को ट्रैक पार करते पकड़ा, जिनसे 80 हजार 60 रुपये का जुर्माना वसूला गया। वर्ष 2021 में कुल 66 लोगों पर कार्रवाई करते हुए 37 हजार दो सौ रुपये का जुर्माना वसूला। 2022 में जनवरी से अब तक कुल 33 लोगों पर कार्रवाई हुई, जिनसे 30 हजार 5 सौ रुपये की वसूली की।
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