सरकारी रिकार्ड के अनुसार किसी भी पशु की जिले में इस बीमारी से मौत नहीं हुई है, परंतु पिसावा व टप्पल में किसान इस बीमारी से सात पशुओं के मरने का दावा कर रहे हैं। इस रोग के प्रकोप को देखते हुए बचाव के लिए गाइड लाइन जारी की गई है।
राजस्थान और गुजरात में कहर बरपाने वाली लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) ने जिले के 1630 पशुओं को बीमार कर दिया है। पशुओं में लंपी स्किन बीमारी थमने का नाम नहीं ले रही है। पिछले सप्ताह से जिले में यह बीमारी पैर पसार चुकी है।
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सरकारी रिकार्ड के अनुसार किसी भी पशु की जिले में इस बीमारी से मौत नहीं हुई है, परंतु पिसावा व टप्पल में किसान इस बीमारी से सात पशुओं के मरने का दावा कर रहे हैं। इस रोग के प्रकोप को देखते हुए बचाव के लिए गाइड लाइन जारी की गई है। साथ ही पशु चिकित्सकों की 12 टीमें गठित कर निगरानी शुरू कराई गई है। टीम हर दिन निरीक्षण एवं उपचार को लेकर रिपोर्ट तैयार करेगी। इन दिनों गो आश्रय स्थल में रखी गईं गायों के साथ ही किसानों की पालतू गायों में भी रोग फैल रहा है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि लंपी बीमारी के शुरू में ही पकड़ में आने से गोशालाओं में स्थिति काबू में हैं। जिले के पशुपालकों से लंपी से पीड़ित पशुओं को अलग रखने और तत्काल पशुपालन विभाग को सूचित करने की अपील की जा रही है। ताकि स्वस्थ पशुओं तक इस संक्रमित बीमारी को पहुंचने से रोका जा सके। टीमें गांवों में जाकर किसानों को इस बीमारी से बचने के सबंध में जागरूक कर रही हैं कि वह पशुओं को मच्छरों से बचाकर रखें। पशुओं को चारे के लिए बाहर न निकालें।
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जनपद में अब तक लंपी से पीड़ित 1630 पशुओं की पहचान की गई है। अभी रोग से पीड़ित किसी पशु की मौत नहीं हुई है। निगरानी के लिए 12 टीमों का गठन किया गया है। हर दिन टीमें निरीक्षण कर बीमार पशुओं की सेहत की जांच करेंगी और रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। जिले में करीब 3.25 लाख पशु हैं। इनके लिए वैक्सीन की मांग की गई है, जल्द मिलने पर पशुओं का टीकाकरण किया जाएगा।