न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अब माध्यमिक शिक्षा के अंतगर्त जिले के 643 वित्त विहीन विद्यालय अनुदान सूची में आ सकेंगे। जिसके तहत इन विद्यालयों में कार्यरत 12000 वित्तविहीन शिक्षक पूर्णकालिक शिक्षक बनने की दौड़ में शामिल रहेंगे। सरकार द्वारा सात (क) को सात क में बदलने वाली धाराओं के फैसले का शिक्षक संगठनों ने स्वागत किया है।
जबकि वित्तविहीन महासभा ने सरकार द्वारा मैनेजर से 15000 रुपये मानदेय दिलवाने वाले सरकारी फैसले का विरोध किया है। इससे पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ चंदेल गुट के पदाधिकारियों ने शहर के मूल्यांकन केंद्रों पर मूल्यांकन का बहिष्कार किया। जबकि दोपहर में आए प्रदेश नेतृत्व के निर्देश के बाद सभी ने बहिष्कार का समापन कर दिया है।
बता दें कि सरकार द्वारा वित्त विहीन शिक्षकों के हित में शनिवार को लखनऊ में वार्ता के दौरान कई फैसले लेने का वादा किया गया। माध्यमिक शिक्षक संघ चंदेल गुट के प्रांतीय संरक्षक बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि श्रमिक के न्यूनतम वेतन से बढ़ाकर मानदेय देने का वादा सरकार ने किया है।
जिसके तहत कम से कम 15000 रुपये शिक्षकों को दिए जाएंगे। इसके अलावा विद्यालयों की सात (क) की धारा को सात क में बदल दिया जाएगा। यूपी बोर्ड का पारिश्रमिक सीबीएसई बोर्ड की दरों के हिसाब से दिया जाएगा। इससे पूर्व चंदेल गुट के पदाधिकारियों द्वारा किए गए मूल्यांकन के बहिष्कार को समाप्त कर दिया गया है।
जबकि वित्त विहीन महासभा ने मान्यता की धाराएं बदलने और शिक्षकों की सेवा नियमावली जारी करने वाले फैसले का तो स्वागत किया है। लेकिन सरकार द्वारा मैनेजर से 15000 रुपये दिलाने वाले फैसले का विरोध किया है। यह जानकारी देते हुए वित्त विहीन शिक्षक महासभा के प्रदेश महामंत्री नीरज शर्मा ने बताया कि धाराएं बदलने से विद्यालय कम से कम अनुदान सूची में तो आएंगे।
जिससे विद्यालयों को एडेड की मान्यता मिल सकेगी। इससे शिक्षकों का भविष्य बेहतर हो सकेगा। लेकिन 15000 रुपये सरकार को स्वयं देने चाहिए। उन्होंने मैनेजर द्वारा मानदेय दिलवाने वाले फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि सरकार को इसकी स्वयं व्यवस्था की जानी चाहिए।