डेस्क न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
निमोनिया 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का मुख्य कारण है। प्रत्येक 20 सेकेंड में एक बच्चा निमोनिया से मर जाता है। निमोनिया अगर जल्दी से पता चलता है तो रोकथाम और इलाज योग्य है।
यह बात एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के बाल एवं शिशु रोग विभाग की अध्यक्ष प्रो. फरजाना बेग ने विभाग में आयोजित विश्व निमोनिया दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि कुछ आसानी से पता लगाने योग्य संकेत हैं। जैसे तेजी से सांस लेना और खांसी के साथ बुखार। जिनका अगर जल्द पता चलता है तो निमोनिया से होने वाली मौत को रोक सकते हैं। प्रो. बेग ने कहा कि डब्लूएचओ रिपोर्ट के मुताबिक 5 साल से कम आयु के 16 प्रतिशत बच्चे वर्ष 2015 में निमोनिया से मौत का शिकार हो गए। इनमें से अधिकतर मौतें भारत और अन्य विकासशील देशों में हुई। उन्होंने कहा कि स्तनपान, टीकाकरण, पर्यावरणीय प्रदूषण से बचने और अच्छे पोषण आदि कुछ बहुत ही प्रभावी निवारक उपाय हैं। शुरुआती समय पर पता चलने से निमोनिया का घर पर आसानी से इलाज हो सकता है। इस अवसर पर विभाग के इंटर्न डॉ. मामून रशीद, डॉ. रेहान मतीन, डॉ. क्यूमुद्दीन, डॉ. फैजुल हक, डॉ. दिव्या वार्ष्णेय, डॉ. शाहनवाज एवं डॉ. गेवेंद्र राणा तथा रेजीडेंट चिकित्सक डॉ. असद और डॉ. आतिफ ने भी इसी विषय पर संबोधन किया।
निमोनिया दुनिया भर में बच्चों के लिए सबसे बड़ी जानलेवा संक्रामक जानलेवा बीमारी है। मलेरिया, दस्त और खसरा को मिलाकर जितनी मौतें होती हैं, उससे कहीं ज्यादा इस बीमारी से मौतें होती हैं।
-डॉ. फरजाना बेग, अध्यक्ष, बाल एवं शिशु रोग, जेएन मेडिकल कालेज