एएमयू के प्रो. खालिद को हाईकोर्ट से राहत
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के चेयरमैन प्रो. खालिद बिन यूसुफ को उच्च न्यायालय से थोड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट जमा होने तक उन्हें गिरफ्तारी से राहत दी है।
थाना सिविल लाइन क्षेत्र के न्यू सर सैयद नगर निवासी इब्रा खालिद ने 12 नवंबर को अपने पिता प्रो. खालिद बिन यूसुफ के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने पिता पर गालीगलौज, मारपीट, धमकी एवं बंधक बनाकर आग लगाने के प्रयास (धारा 323, 504, 506 एवं 342) का आरोप लगाया था। प्रो. खालिद की ओर से इस केस के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट पिटीशन दायर की गई थी। प्रो. खालिद ने बताया कि न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी पर जांच रिपोर्ट जमा होने तक रोक लगा दी है। न्यायालय ने जांच टीम को सहयोग करने को निर्देशित किया है। उन्होंने बताया कि स्टे आर्डर की कॉपी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पास भेज दी है।
एएमयू के संस्कृत विभाग के चेयरमैन प्रोफेसर खालिद बिन यूसुफ पर पहले मौखिक और बाद में व्हाट्सएप व मोबाइल मैसेज से पत्नी को तीन तलाक देने का आरोप लगा था। उसके बाद प्रो. खालिद की छोटी पुत्री इब्रा ने थाना सिविल लाइन में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इब्रा ने आरोप लगाया था कि 10 नवंबर को वह अपने भाई उसैद के साथ मां की गैरमौजूदगी में घर पर पढ़ाई कर रही थी। तब पिता, उनके साथी वसीम रजा और शहनवाज आए। दरवाजा नहीं खोलने पर जोर-जोर से चिल्लाने लगे कि दरवाजा खोलो वरना आग लगाकर जिंदा जला देंगे। घबराकर मां को फोन किया। मां ने 100 नंबर को फोन किया तो पुलिस पहुंची। पुलिस के आने से पूर्व तीनों ने सभी दरवाजों पर बाहर से ताले लगाकर नजरबंद कर दिया था। पुलिस ने आकर ताले तुड़वाये। पुलिस न आती तो हमें जिंदा जला दिया जाता। इब्रा का कहना था कि 18 सितंबर से अब्बा झगड़ा कर हमसे अलग रह रहे हैं। इब्रा की बड़ी बहन इला अपने पिता के साथ रह रही हैं।