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आयोग को गया जवाब लेकिन सम्मन मिलने से इंकार

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्ग को आरक्षण नहीं देने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के नोटिस का जवाब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा आयोग को भेज दिया गया है। लेकिन एएमयू के अधिकारियों ने अब तक आयोग से किसी तरह का समन मिलने से इंकार किया है।

एएमयू पीआरओ आफिस के मेंबर इंचार्ज प्रो. शाफे किदवई ने बताया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को नोटिस का जवाब भेज दिया गया है। आयोग द्वारा पूछा गया था कि एएमयू में एससी, एसटी एवं ओबीसी का आरक्षण किस आधार पर रोक रखे हैं।
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एएमयू के जवाब के बाद आयोग द्वारा समन भेजे जाने के संबंध में प्रो. किदवई का कहना है कि अभी तक कोई समन प्राप्त नहीं हुआ है। सूत्रों का कहना है कि आयोग को भेजे गए जवाब में भी मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने की बात कही गयी है।

उल्लेखनीय है कि जुलाई के पहले सप्ताह में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष प्रो. रामशंकर कठेरिया अलीगढ़ आए थे। उन्होंने एएमयू के अधिकारियों से आरक्षण के संबंध में बातचीत की थी। उन्होंने पूछा था कि किस आधार पर एएमयू में आरक्षण नहीं दिया जा रहा है। एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान है तो साक्ष्य दिखाएं।

रामशंकर कठेरिया का कहना था कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। यह एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है और भारत के संविधान के अधीन पारित सभी आदेश-निर्देश यहां लागू है। सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ ने 1968 में अजिज बाशा केस में सर्वसम्मति से निर्णय दिया है कि एएमयू एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है, अल्पसंख्यक संस्था नहीं है।
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उन्होंने कहा कि 1981 में एएमयू एक्ट की धारा 2 (1) में संशोधन एवं धारा 5 (2) (सी) के जोड़ने को इलाहाबाद उच्च न्यायालय 2005 एवं 2006 में दो बार निरस्त कर चुका है। उच्च न्यायालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट के 1968 के अजीज बाशा केस के फैसले को सही माना गया। 1968, 2005 एवं 2006 के न्यायालय के फैसले के आलोक में एएमयू को एससी, एसटी एवं ओबीसी के छात्रों एवं कर्मचारियों को आरक्षण देना चाहिए।
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