1-अंग्रेज वायसराय को क्लाेराइटस नाम की बीमारी होने पर वैद्य राधावल्लभ विजयगढ़ से कोलकाता बुलाए गए थे। वैद्य जी ने उनका मठ्ठे से होने वाली कल्प चिकित्सा पद्वति से इलाज किया था। जिससे वायसराय ठीक हुए और विजयगढ़ का नाम मशहूर हुआ।
2-देश की यूनीकार्न कंपनियों में शामिल पेटीएम के मालिक विजयशेखर शर्मा के बाबा वैद्य गुरुदत्त शर्मा ज्वर, मोतीझाला, चेचक जैसी बीमारियों के इलाज के बहुत मशहूर हुए थे।
3-विजयगढ़ के सबसे पहले मशहूर वैद्य नारायण दास थे, जिन्होंने धनवंतरि कार्यालय फार्मेसी की स्थापना की थी। जो आजतक कार्यरत हैं।
4-देवीशरण गर्ग लकवा रोग के बेहद मशहूर वैद्य थे, उन्होंने कई रोगियों को इससे निजात दिलाई थी। उनके परिवार के तीसरी पीढ़ी इस काम में है।
आयुर्वेदिक दवाओं का गणित
- 40 करोड़ रुपये से अधिक का सलाना टर्नओवर।
- 07 करोड़ रुपये से अधिक का आयकर और जीएसटी दे रहे।
- 800 पेटेंट दवाओं का निर्माण यहां हो रहा है।
- 500 से अधिक दवाएं शास्त्रोक्त पद्वति से बनाई जा रहीं।
- 2022 से कई दवाएं अमेजन और अन्य ई कामर्स प्लेटफार्म पर।
- 2019 में कोरोना काल दवाओं की मांग कई गुना बढ़ गई ही।
- 2013 में दवा कारोबार 15 करोड़ रुपये के आसपास था।
- 2023 में ये व्यापार लगभग 40 करोड़ रुपये तक पहुंच रहा है।
- 700 लोगों को विजयगढ़ में मिल रहा है कारोबार।
- 1000 से ज्यादा एजेंसी अलीगढ़ से बाहर काम कर रहीं।
वैद्यनगरी का अतीत
- 150 वर्ष पहले विजयगढ़ में आयुर्वेदिक दवाएं बनना शुरू हुआ।
- 1898 में पहली धनवंतरि कार्यालय फार्मेसी की स्थापना हुई।
- 1964 में आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण का लाइसेंस जारी होना शुरू हुआ।
- 1972 में पहली बार आयुर्वेदिक पद्वति की दवा का कैप्सूल बना।
- 2012 में पहले धनवंतरि मंदिर की स्थापना हुई।