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ट्रेन.. मुसाफिरों को सीटों से जबरन उतारकर पैर पसार कर सोते हैं दूधि
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सुशासन मंत्र रेलमंत्री सुरेश प्रभु की ट्रेनों में नहीं दिखता है। यहां सुशासन का मंत्र दूधियों पर कोई असर नहीं डालता है। अलीगढ़ से देर रात 1.55 बजे चलने वाली 12 डिब्बों की तेज रफ्तार ईएमयू ट्रेन का दशकों से यही हाल है। इसके बावजूद ट्रेन में मुसाफिरों की सुरक्षा के लिए एक भी सिपाही नहीं है। वाकया शुक्रवार रात का है। अपने निर्धारित वक्त से अलीगढ़ से चलने के बाद ट्रेन में महरावल, कलुआ और सोमना स्टेशन तक तो सब ठीकठाक रहता है। इसके बाद जो आतंक शुरू होता है, वह पुरानी दिल्ली स्टेशन तक बाकायदा जारी रहता है। इस ट्रेन पर सरकारों के बदलने का कोई असर नहीं होता है।

डाबर स्टेशन से पहला दूधिया सवार होता है, जोे सीटों पर सोने के लिए बाकी मुसाफिरों को जमीन पर उतार देता है। चेतावनी भी स्पष्ट रूप से दी जाती है कि सीटों से उतर जाओ वरना हम उतार देंगे। किसी ने सवाल पूछा या विरोध किया तो गालीगलौज के साथ मारपीट शुरू। ये नजारा देख कर बाकी मुसाफिर सहम जाते हैं। जो नहीं उतरते उन्हें हाथ पकड़ कर उतारा जाता है। दुधिया बार बार कहता है कि आप लोग सीटों से हट जाइए। उनका सीटों पर रिजर्वेशन है। आगे के स्टेशनों पर और दूधिए सवार होंगे और उनकी दूध की टंकी और सोने की जगह फिक्स है। जिसमें कोई परिवर्तन नहीं होगा। दनकौर और मारीपत पर दर्जनों दूधिया सवार हो जाते हैं और पूरी ट्रेन में ऐसा ही आतंक कायम रहता है। इस दौरान मारीपत में कुछ दूधिए चढ़ने में लेट हो गए तो
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आवाज देकर ट्रेन को रुकवा लिया गया।
ट्विटर पर दूध और दवा उपलब्ध कराने वाले रेलमंत्री सुरेश प्रभु इस ट्रेन की गुंडागर्दी का इलाज नहीं कर पाए। पीड़ित मुसाफिर यही कहते रहे। जवाब में दुधियों ने कहा कि वो तो अब उनकी संख्या कम हो गई है। बोले.. सरकारी कामों में खेत और जमीन चली गई हैं तो मुआवजे से मिली रकम से दूसरे कारोबार कर लिए। नहीं तो पूरी ट्रेन में उनका ही कब्जा रहता था। सवा पांच बजे सुबह दिल्ली उतरने तक कोई देखने सुनने वाला नहीं मिला..। मुसाफिर मोदी राज में दहशत के मारे प्रभु प्रभु करते रहे..। इस संबंध में इंस्पेक्टर आरपीएफ नवल किशोर ने कहा कि अचानक ट्रेन में चेकिंग कराई जाती है। आगे भी निरीक्षण होगा और दहशत फैलाने वालों पर कार्रवाई होगी।
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